नई दिल्ली में ADMM-Plus बैठक, भारत-आसियान आतंकवाद-रोधी सहयोग को नई धार
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ADMM-Plus-Counter-Terrorism-Meeting-New-Delhi-2026
नई दिल्ली में ADMM-Plus EWG बैठक आतंकवाद-रोधी बहुपक्षीय सहयोग, रणनीतिक समन्वय और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने पर केंद्रित रहेगी।
भारत और मलेशिया की सह-अध्यक्षता में 18 देशों की भागीदारी, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में साझा सुरक्षा दृष्टिकोण को सुदृढ़ करेगी।
New Delhi/ नई दिल्ली में 14 से 16 जनवरी 2026 तक आतंकवाद-रोधी सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक से जुड़े विशेषज्ञ कार्य समूह (ADMM-Plus EWG on Counter-Terrorism) की 16वीं बैठक का आयोजन किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण बहुपक्षीय बैठक की सह-अध्यक्षता भारत और मलेशिया संयुक्त रूप से करेंगे।
इस बैठक में आसियान के 11 सदस्य देशों-ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओ पीडीआर, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, वियतनाम, सिंगापुर, थाईलैंड और तिमोर लेस्ते-के प्रतिनिधि भाग लेंगे। इसके अतिरिक्त सात संवाद साझेदार देश ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जापान, दक्षिण कोरिया, चीन, अमेरिका और रूस के प्रतिनिधि भी बैठक में शामिल होंगे। आसियान सचिवालय के प्रतिनिधियों की भागीदारी इस बैठक को और अधिक रणनीतिक बनाएगी।
यह बैठक 2024 से 2027 तक चल रहे तीन वर्षीय चक्र की तीसरी बैठक होगी। इसका प्रमुख उद्देश्य पिछले सत्र के बाद आतंकवाद-रोधी सहयोग में हुई प्रगति की समीक्षा करना और भविष्य की संयुक्त गतिविधियों के लिए रोडमैप तैयार करना है। भारत-आसियान रक्षा सहयोग ढांचे के अंतर्गत चल रही और प्रस्तावित पहलों पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया जाएगा।
बैठक के पहले दिन 14 जनवरी को आपात स्थिति और संकट प्रबंधन से जुड़ा एक विशेष ‘टेबल टॉप एक्सरसाइज’ (TTX) आयोजित किया जाएगा, जिसमें आतंकवादी घटनाओं से निपटने की रणनीतियों, समन्वय तंत्र और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमताओं पर चर्चा होगी। मलेशिया वर्ष 2026 में अगली विशेषज्ञ कार्य समूह बैठक के दौरान इसी तरह की टेबल टॉप एक्सरसाइज की मेजबानी करेगा, जबकि भारत 2027 में फील्ड ट्रेनिंग एक्सरसाइज आयोजित करेगा।
एडीएमएम-प्लस ढांचा रक्षा प्रतिष्ठानों के बीच व्यावहारिक सहयोग का एक प्रमुख मंच है, जो वर्तमान में सात प्रमुख क्षेत्रों समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी अभियान, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत, शांतिरक्षा अभियान, सैन्य चिकित्सा, मानवीय बारूदी सुरंग कार्रवाई और साइबर सुरक्षा पर केंद्रित है। इन क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए अलग-अलग विशेषज्ञ कार्य समूह कार्यरत हैं।
सह-अध्यक्षों की भूमिका तीन वर्षीय चक्र के लिए रणनीतिक दिशा तय करने, नियमित बैठकों का संचालन करने और अंतिम वर्ष में संयुक्त अभ्यास आयोजित कर सहयोग की प्रगति का आकलन करने की होती है। यह बैठक भारत की “एक्ट ईस्ट नीति” के अनुरूप क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को नई मजबूती प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।