PFC-REC विलय को मंजूरी, 11 लाख करोड़ रुपये की बनेगी वित्तीय दिग्गज कंपनी

Tue 30-Jun-2026,02:17 PM IST +05:30

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PFC-REC विलय को मंजूरी, 11 लाख करोड़ रुपये की बनेगी वित्तीय दिग्गज कंपनी PFC-REC Merger
  • PFC और REC के बोर्ड ने विलय योजना को मंजूरी दी।

  • विलय के बाद 11 लाख करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय इकाई बनेगी।

  • REC के 100 शेयरों पर PFC के 88 शेयर देने का प्रस्ताव।

Delhi / Delhi :

Delhi / पावर सेक्टर की दो प्रमुख सरकारी वित्तीय कंपनियों, पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PFC) और आरईसी लिमिटेड (REC), के विलय की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। दोनों कंपनियों के निदेशक मंडल ने कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 230 से 232 और अन्य लागू प्रावधानों के तहत आरईसी को पीएफसी में विलय करने की योजना को मंजूरी दे दी है। यदि यह विलय सभी आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त कर लेता है, तो इससे देश की सबसे बड़ी वित्तपोषण संस्थाओं में से एक का गठन होगा, जिसका कुल ऋण पोर्टफोलियो 11 लाख करोड़ रुपये से अधिक होगा।

यह प्रस्तावित विलय भारत के बिजली और अवसंरचना क्षेत्र के वित्तपोषण को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों कंपनियों के एक मंच पर आने से संसाधनों का बेहतर उपयोग, परिचालन दक्षता में वृद्धि और वित्तीय क्षमता का विस्तार संभव होगा। साथ ही, बड़े पैमाने पर परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करने में भी यह नई इकाई अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकेगी।

हालांकि, यह विलय अभी अंतिम रूप से लागू नहीं हुआ है। इसके लिए दोनों कंपनियों के शेयरधारकों, लेनदारों, नियामक संस्थाओं और विभिन्न सरकारी प्राधिकरणों से आवश्यक अनुमोदन प्राप्त करना होगा। इसके अलावा यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि विलय के बाद बनने वाली इकाई कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत ‘सरकारी कंपनी’ का दर्जा बनाए रखे और भारत सरकार का उसमें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बहुमत नियंत्रण कायम रहे।

विलय योजना के तहत शेयर विनिमय अनुपात भी तय कर दिया गया है। मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार, आरईसी के प्रत्येक 100 इक्विटी शेयरों के बदले शेयरधारकों को पीएफसी के 88 इक्विटी शेयर दिए जाएंगे। यह आवंटन भविष्य में निर्धारित रिकॉर्ड तिथि के आधार पर किया जाएगा। इस प्रस्तावित अनुपात का उद्देश्य दोनों कंपनियों के शेयरधारकों के हितों का संतुलन बनाए रखना है।

इस महत्वपूर्ण कॉर्पोरेट लेनदेन के लिए कई प्रतिष्ठित सलाहकार संस्थाओं की सेवाएं ली गई हैं। डेलॉयट टच तोहमात्सु इंडिया एलएलपी को लेनदेन और कर सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया है, जबकि सिरिल अमरचंद मंगलदास कानूनी सलाहकार की भूमिका निभा रहा है। मूल्यांकन प्रक्रिया के लिए पीएफसी ने आरबीएसए वैल्यूएशन एडवाइजर्स एलएलपी और आरईसी ने अर्न्स्ट एंड यंग मर्चेंट बैंकिंग सर्विसेज एलएलपी को नियुक्त किया था। वहीं, निष्पक्ष राय (Fairness Opinion) देने के लिए पीएफसी ने एसबीआई कैपिटल मार्केट्स और आरईसी ने नुवामा वेल्थ मैनेजमेंट की सेवाएं ली हैं।

यदि सभी मंजूरियां समय पर मिल जाती हैं, तो यह विलय भारतीय वित्तीय और ऊर्जा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है। इससे न केवल दोनों कंपनियों की वित्तीय ताकत बढ़ेगी, बल्कि देश के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।