ग्रामीण विकास सम्मेलन में शिवराज सिंह चौहान का बड़ा संदेश, विकसित भारत के लिए गांवों पर फोकस
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Rural Development Conference
राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन में विकसित भारत के लिए गांवों पर विशेष फोकस।
PMAY-G, PMGSY, NRLM और VB-GRAM-G योजनाओं पर विस्तृत चर्चा।
महिला सशक्तिकरण, रोजगार और ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने पर जोर।
Delhi / प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को जमीनी स्तर पर साकार करने के उद्देश्य से केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली में दो दिवसीय राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन का शुभारंभ किया गया। सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया। इस आयोजन में देशभर के राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से आए अधिकारी, विशेषज्ञ और नीति निर्माता ग्रामीण विकास की योजनाओं, चुनौतियों और भविष्य की रणनीतियों पर मंथन कर रहे हैं।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह सम्मेलन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि विकसित भारत के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इसे “टीम इंडिया–टीम रूरल डेवलपमेंट” का साझा प्रयास बताते हुए कहा कि गांवों के विकास के बिना विकसित भारत की कल्पना अधूरी है। उनके अनुसार, भारत की आत्मा गांवों में बसती है और ग्रामीण विकास ही देश की समृद्धि का आधार है।
शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “मैन ऑफ आइडिया” बताते हुए कहा कि उनके मन में एक आत्मनिर्भर, विकसित और गौरवशाली भारत का सपना है। इस सपने को साकार करने के लिए केंद्र और राज्यों को मिलकर मिशन मोड में काम करना होगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
अपने संबोधन में उन्होंने गांवों को भारत की संस्कृति, अर्थव्यवस्था और लोकतंत्र की सबसे मजबूत इकाई बताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन ग्रामीण समृद्धि का “अमृत मंथन” है, जिससे निकलने वाले सुझाव आने वाले वर्षों में देश के गांवों के विकास की दिशा तय करेंगे।
मनरेगा और विकसित भारत-जी राम जी (VB-GRAM-G) पर चर्चा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ग्रामीण विकास योजनाओं में सुधार के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि अतीत में कुछ स्थानों पर मनरेगा के क्रियान्वयन में अनियमितताएं देखने को मिली थीं, लेकिन अब पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए सुधार किए जा रहे हैं। मजदूरों के कार्य दिवस 100 से बढ़ाकर 125 किए गए हैं और यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति रोजगार से वंचित न रहे।
सम्मेलन में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम जैसे प्रमुख विषयों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को हर हाल में लाभ मिलना चाहिए और किसी भी गरीब परिवार को पक्षपात या प्रशासनिक लापरवाही के कारण वंचित नहीं रहना चाहिए।
महिला सशक्तिकरण पर बोलते हुए उन्होंने ‘लखपति दीदी’ अभियान को ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी करोड़ों महिलाएं आज आत्मनिर्भर बन रही हैं और सरकार का लक्ष्य इस संख्या को और बढ़ाना है। अब महिलाओं को पारंपरिक गतिविधियों के साथ-साथ फूड प्रोसेसिंग, एग्री-बिजनेस, डिजिटल सेवाओं और उद्यमिता से भी जोड़ा जा रहा है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव रोहित कंसल ने बताया कि पिछले 12 वर्षों में देश में लगभग 8 लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़कें बनाई गई हैं, 3 करोड़ से अधिक पक्के घर तैयार हुए हैं और 10 करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि अब अगला लक्ष्य इन उपलब्धियों को टिकाऊ बनाना और ग्रामीण भारत में लोगों के जीवन स्तर को और बेहतर करना है।
सम्मेलन के दूसरे दिन सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्री शामिल होंगे। इस दौरान ग्रामीण विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर नीतिगत चर्चा होगी और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए साझा रोडमैप तैयार किया जाएगा। यह सम्मेलन आने वाले वर्षों में ग्रामीण भारत की दिशा और दशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।