Ankita Bhandari Case: देहरादून CBI ऑफिस में तालाबंदी, जांच पर उठे सवाल

Thu 02-Jul-2026,02:58 PM IST +05:30

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Ankita Bhandari Case: देहरादून CBI ऑफिस में तालाबंदी, जांच पर उठे सवाल Ankita Bhandari Case
  • अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच ने CBI कार्यालय में तालाबंदी का ऐलान किया।

  • कथित VIP से पूछताछ और जांच की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए गए।

  • सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों ने आंदोलन को समर्थन दिया।

Uttarakhand / Dehradun :

Dehradun / उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर जनआक्रोश सड़कों पर दिखाई देने लगा है। मामले में न्याय और पारदर्शी जांच की मांग को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों, जन आंदोलनों और विपक्षी दलों ने संयुक्त रूप से आवाज बुलंद की है। गुरुवार को अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के बैनर तले देहरादून स्थित सीबीआई कार्यालय में शांतिपूर्ण तालाबंदी कार्यक्रम का ऐलान किया गया। इस कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न जिलों से लोगों के शामिल होने की संभावना जताई गई है।

इस आंदोलन की तैयारी को लेकर संघर्ष मंच से जुड़े प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक दलों की एक बैठक आयोजित की गई। बैठक में कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता सुजाता पॉल भी शामिल हुईं। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड को कई महीने बीत चुके हैं, लेकिन आज भी जनता के कई महत्वपूर्ण सवाल अनुत्तरित हैं। उनका कहना है कि जांच एजेंसियों ने अब तक उन मुद्दों पर स्पष्ट जानकारी नहीं दी है, जिनको लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

सुजाता पॉल ने कहा कि इस मामले में शुरुआत से ही एक कथित वीआईपी का जिक्र सामने आता रहा है। कई बार यह मुद्दा सार्वजनिक चर्चाओं और मीडिया रिपोर्टों में भी उठाया गया, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उस व्यक्ति से पूछताछ की गई है या नहीं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी व्यक्ति का नाम जांच के दौरान बार-बार सामने आ रहा है, तो जांच एजेंसियों को इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि जिस रिजॉर्ट से यह पूरा मामला जुड़ा था, उस पर बुलडोजर चलाए जाने को लेकर भी लगातार सवाल उठते रहे हैं। आंदोलनकारियों का आरोप है कि इस कार्रवाई से महत्वपूर्ण सबूत प्रभावित हो सकते थे। उनका कहना है कि इस मामले में भी अब तक कोई स्पष्ट जवाब या कार्रवाई सामने नहीं आई है।

संयुक्त संघर्ष मंच की सदस्य कमला पंत ने बताया कि कुछ समय पहले प्रतिनिधिमंडल ने सीबीआई कार्यालय जाकर अधिकारियों से मुलाकात की थी। उस दौरान जांच की प्रगति और महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी साझा करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। इसी वजह से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

कमला पंत ने कहा कि आंदोलन के दौरान सीबीआई से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे जाएंगे। इनमें कथित वीआईपी व्यक्तियों से पूछताछ, उनकी भूमिका की जांच, अंकिता भंडारी के माता-पिता से अब तक पूछताछ न होने, भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ की करीबी उर्मिला सनावर से पूछताछ नहीं किए जाने और कथित तौर पर सबूत मिटाने वालों पर कार्रवाई न होने जैसे मुद्दे शामिल हैं।

संघर्ष मंच का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक लाभ के लिए आंदोलन करना नहीं है, बल्कि मामले की निष्पक्ष जांच, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। आंदोलनकारियों का मानना है कि जब तक सभी सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं मिलते और दोषियों पर उचित कार्रवाई नहीं होती, तब तक न्याय की मांग जारी रहेगी। अब देखना होगा कि इस नए आंदोलन और बढ़ते जनदबाव के बीच जांच एजेंसियां क्या रुख अपनाती हैं।