दिल्ली को मिलेगी नई सुरंग, द्वारका एक्सप्रेसवे-वसंत कुंज लिंक परियोजना को मंजूरी

Wed 01-Jul-2026,08:59 PM IST +05:30

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दिल्ली को मिलेगी नई सुरंग, द्वारका एक्सप्रेसवे-वसंत कुंज लिंक परियोजना को मंजूरी Dwarka Expressway
  • द्वारका एक्सप्रेसवे-वसंत कुंज लिंक के लिए 6 लेन सुरंग परियोजना को मंजूरी।

  • 6,969 करोड़ रुपये की लागत से दिल्ली-एनसीआर की कनेक्टिविटी होगी बेहतर।

  • परियोजना से लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर सृजित होंगे।

Delhi / Delhi :

Delhi / केंद्र सरकार ने दिल्ली-एनसीआर की यातायात व्यवस्था को और बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने द्वारका एक्सप्रेसवे को दक्षिण दिल्ली के वसंत कुंज क्षेत्र से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़क सुरंग परियोजना को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना पर करीब 6,969.67 करोड़ रुपये की लागत आएगी और इसे हाइब्रिड वार्षिकी मॉडल (HAM) के तहत विकसित किया जाएगा।

यह परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग-148एई के अंतर्गत विकसित की जाएगी और इसकी कुल लंबाई लगभग 8.1 किलोमीटर होगी। इसका मुख्य उद्देश्य पश्चिमी और दक्षिणी दिल्ली के बीच यातायात संपर्क को तेज, सुगम और सुरक्षित बनाना है। परियोजना पूरी होने के बाद द्वारका एक्सप्रेसवे, अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 (UER-2), वसंत कुंज, गुरुग्राम, आईजीआई एयरपोर्ट और दक्षिण दिल्ली के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा।

इस परियोजना की सबसे खास बात इसकी आधुनिक ट्विन-ट्यूब सुरंग है, जो रंगपुरी क्षेत्र से होकर दक्षिणी रिज वन के नीचे बनेगी। लगभग 3.14 किलोमीटर लंबी यह सुरंग अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीन (TBM) तकनीक से तैयार की जाएगी। सुरंग शिवमूर्ति इंटरचेंज से शुरू होकर नेल्सन मंडेला मार्ग और महिपालपुर-छतरपुर रोड के पास समाप्त होगी। इससे सतह पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा और पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील दक्षिणी रिज वन क्षेत्र भी सुरक्षित रहेगा।

यातायात को और सुचारु बनाने के लिए परियोजना में कई अतिरिक्त ढांचागत सुविधाएं भी शामिल की गई हैं। नेल्सन मंडेला मार्ग के समानांतर लगभग 1.8 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड सड़क बनाई जाएगी। इसके अलावा महिपालपुर-छतरपुर मार्ग पर मौजूदा फ्लाईओवर के समानांतर एक नया फ्लाईओवर और छतरपुर की ओर से आने वाले वाहनों के लिए विशेष एलिवेटेड यू-टर्न का निर्माण भी प्रस्तावित है। इन व्यवस्थाओं से प्रमुख चौराहों पर जाम की समस्या कम होगी और वाहन चालकों को अधिक सुविधा मिलेगी।

परियोजना के तहत 6.3 किलोमीटर मुख्य कैरिजवे विकसित किया जाएगा। इसमें सुरंग, सुरंग के अप्रोच रैंप, एलिवेटेड हिस्से, रिटेनिंग वॉल और ग्रेड सड़कें शामिल होंगी। यह संपूर्ण कॉरिडोर दिल्ली के विभिन्न हिस्सों के बीच निर्बाध यातायात सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना केवल यातायात सुधार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक विकास को भी नई गति देगी। बेहतर संपर्क व्यवस्था से आसपास के क्षेत्रों में निवेश, व्यापार और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। सरकार के अनुमान के अनुसार इस परियोजना के निर्माण के दौरान लगभग 7.54 लाख व्यक्ति-दिवस का प्रत्यक्ष रोजगार और करीब 9.80 लाख व्यक्ति-दिवस का अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होगा।

दिल्ली और एनसीआर में लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए यह परियोजना बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके पूरा होने के बाद पश्चिमी, दक्षिणी और पूर्वी दिल्ली के साथ-साथ गुरुग्राम, नोएडा और गाजियाबाद के बीच यात्रा अधिक आसान, तेज और सुविधाजनक हो जाएगी। यह परियोजना राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है।