आंध्र प्रदेश शराब घोटाला: ED ने YSRCP सांसद पीवी मिधुन रेड्डी को भेजा समन
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ED Raid Andhra Pradesh
शराब घोटाले में YSRCP सांसद को ईडी का समन.
23 जनवरी को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ.
पूर्व सरकार की शराब नीति पर जांच तेज.
Indore / प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आंध्र प्रदेश के कथित 3,500 करोड़ रुपये के शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के सांसद पीवी मिधुन रेड्डी को समन जारी किया है। अधिकारियों के अनुसार, रेड्डी को 23 जनवरी को ईडी के जोनल कार्यालय में पेश होकर पूछताछ में शामिल होना होगा, जहां उनका बयान प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत दर्ज किया जाएगा। यह मामला उस अवधि से जुड़ा है, जब आंध्र प्रदेश में पिछली वाईएसआरसीपी सरकार सत्ता में थी।
पीवी मिधुन रेड्डी पहले ही इस मामले में जांच के दायरे में आ चुके हैं। जुलाई 2025 में आंध्र प्रदेश पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने उन्हें आरोपी बनाया था और गिरफ्तार भी किया था। हालांकि, बाद में उन्हें जमानत मिल गई और वे फिलहाल बाहर हैं। ईडी की यह कार्रवाई उसी जांच की कड़ी मानी जा रही है, जिसमें शराब नीति के जरिए बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और अवैध धन के लेन-देन के आरोप लगाए गए हैं।
इससे पहले ईडी ने पूर्व सांसद विजयसाई रेड्डी को भी समन भेजा था। उन्हें 22 जनवरी को 2019 से 2024 के बीच लागू रही आंध्र प्रदेश की शराब नीति के क्रियान्वयन को लेकर पूछताछ के लिए बुलाया गया था। जांच एजेंसियों का आरोप है कि विजयसाई रेड्डी ने शराब घोटाले से जुड़े अवैध धन को तत्कालीन मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित नेताओं की ओर से लगातार राजनीतिक बदले की कार्रवाई का दावा किया जाता रहा है।
केंद्रीय जांच एजेंसी ने आंध्र प्रदेश पुलिस की एसआईटी की शिकायत के आधार पर सितंबर 2025 में इस कथित घोटाले की जांच के लिए धन-शोधन निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। पुलिस अब तक इस मामले में तीन चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। एसआईटी की चार्जशीट में पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। चार्जशीट के अनुसार, वह उन लोगों में शामिल थे, जिन्हें हर महीने औसतन 50 से 60 करोड़ रुपये की रिश्वत मिलने का दावा किया गया है।
पुलिस का यह भी आरोप है कि जुलाई 2019 में जगन मोहन रेड्डी की अध्यक्षता में शराब नीति को लेकर एक अहम बैठक हुई थी। इस बैठक में फैसला लिया गया कि राज्य की शराब दुकानों का संचालन आंध्र प्रदेश स्टेट बेवरेजेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड के माध्यम से किया जाएगा, जो एक सरकारी संस्था है। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस प्रक्रिया में जानबूझकर इंडियन रेलवे ट्रैफिक सर्विस के अधिकारी डी. वासुदेव रेड्डी को स्टेट बेवरेजेज कॉर्पोरेशन का प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया।
चार्जशीट में यह भी उल्लेख है कि पूर्व नौकरशाह रजत भार्गव ने स्टेट बेवरेजेज कॉर्पोरेशन में हो रही कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय को कई बार चेतावनी देने की कोशिश की थी। बावजूद इसके, उनकी बातों को नजरअंदाज किया गया। जब यह कथित घोटाला सामने आया, उस समय रजत भार्गव एक्साइज विभाग के विशेष मुख्य सचिव के पद पर तैनात थे। इस पूरे मामले ने आंध्र प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज कर दी है और आने वाले दिनों में जांच के साथ-साथ सियासी बयानबाजी भी और तेज होने की संभावना है।