कोविड मौत बीमा विवाद: बिलासपुर आयोग ने मैक्स लाइफ को 1 करोड़ देने का आदेश

Wed 21-Jan-2026,12:51 PM IST +05:30

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कोविड मौत बीमा विवाद: बिलासपुर आयोग ने मैक्स लाइफ को 1 करोड़ देने का आदेश Bilaspur-Consumer-Court-Covid-Insurance-Claim-Max-Life
  • दावा खारिज करने को आयोग ने मानसिक प्रताड़ना और बीमा नियमों का उल्लंघन मानते हुए कंपनी पर जुर्माना लगाया।

  • मेडिकल जांच में पॉलिसीधारक स्वस्थ पाई गई थीं, इसलिए “पहले से बीमारी” का तर्क पूरी तरह खारिज।

Chhattisgarh / Bilaspur :

बिलासपुर/ कोविड-19 से हुई मृत्यु के एक अहम बीमा दावे में बिलासपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने मैक्स लाइफ इंश्योरेंस के खिलाफ ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। आयोग ने बीमा कंपनी को मृतका के परिजनों को 1 करोड़ रुपये की बीमा राशि 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित देने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही मानसिक पीड़ा और वाद व्यय के लिए 2 लाख रुपये अतिरिक्त भुगतान का भी आदेश दिया गया है।

यह मामला बिलासपुर निवासी कौशल प्रसाद कौशिक से जुड़ा है, जिन्होंने अपनी पत्नी शैल कौशिक के नाम पर मैक्स लाइफ इंश्योरेंस का “प्लैटिनम वेल्थ प्लान” लिया था। पॉलिसी जारी होने से पहले बीमा कंपनी की ओर से कराई गई सभी आवश्यक मेडिकल जांचों में शैल कौशिक को पूरी तरह स्वस्थ पाया गया था। इसके बावजूद बाद में बीमा दावा खारिज किए जाने पर मामला उपभोक्ता आयोग पहुंचा।

सितंबर 2020 में शैल कौशिक कोविड-19 से संक्रमित हुईं। इलाज के दौरान उनकी हालत बिगड़ती चली गई और 11 अक्टूबर 2020 को उनका निधन हो गया। इसके बाद पति कौशल प्रसाद कौशिक ने बीमा दावा प्रस्तुत किया, लेकिन मैक्स लाइफ इंश्योरेंस ने यह कहते हुए दावा अस्वीकार कर दिया कि पॉलिसीधारक पहले से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित थीं।

उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी के इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि जब पॉलिसी जारी करने से पहले मेडिकल जांच में महिला को पूरी तरह स्वस्थ घोषित किया गया था, तो बाद में “पहले से गंभीर बीमारी” का आधार बनाकर दावा खारिज करना बीमा नियमों का उल्लंघन है। आयोग ने माना कि कंपनी की इस कार्रवाई से उपभोक्ता को मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी।

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि बीमा कंपनियों की जिम्मेदारी है कि वे पॉलिसी जारी करते समय किए गए मेडिकल परीक्षणों की रिपोर्ट का सम्मान करें। बिना ठोस सबूत के दावा खारिज करना न केवल अनुचित व्यापार व्यवहार है, बल्कि उपभोक्ता अधिकारों का भी हनन है।

फैसले के अनुसार, मैक्स लाइफ इंश्योरेंस को 1 करोड़ रुपये की बीमा राशि के साथ 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज अदा करना होगा। इसके अतिरिक्त, मानसिक पीड़ा और वाद व्यय के लिए 2 लाख रुपये का भुगतान भी तुरंत करना होगा। इस निर्णय को कोविड-19 से जुड़े बीमा दावों के मामलों में एक महत्वपूर्ण नजीर के रूप में देखा जा रहा है।