Haryana Congress: हुड्डा और सुरजेवाला की नोकझोंक से तेज हुई गुटबाजी की चर्चा

Thu 09-Jul-2026,03:44 PM IST +05:30

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Haryana Congress: हुड्डा और सुरजेवाला की नोकझोंक से तेज हुई गुटबाजी की चर्चा Haryana Congress News
  • कांग्रेस बैठक में हुड्डा और सुरजेवाला के बीच तंज भरी बातचीत चर्चा में रही।

  • वायरल वीडियो के बाद हरियाणा कांग्रेस की गुटबाजी पर सवाल उठे।

  • पार्टी नेतृत्व ने संगठन मजबूत करने और एकजुटता पर जोर दिया।

Haryana / Gurgaon :

Gurgaon / हरियाणा कांग्रेस में लंबे समय से चली आ रही अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आती नजर आ रही है। पंजाब कांग्रेस में नेताओं के बीच मतभेदों की चर्चा के बीच अब हरियाणा कांग्रेस भी गुटबाजी को लेकर सुर्खियों में है। हाल ही में चंडीगढ़ में आयोजित कांग्रेस नेताओं की बैठक के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और वरिष्ठ कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला के बीच हुई टिप्पणी और जवाबी टिप्पणी ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

यह पूरा घटनाक्रम उस समय सामने आया जब कांग्रेस के नए हरियाणा प्रभारी संजय दत्त ने पार्टी संगठन को मजबूत करने और आगामी राजनीतिक रणनीति पर चर्चा के लिए प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं, विधायकों और पदाधिकारियों की बैठक बुलाई थी। बैठक में भूपेंद्र सिंह हुड्डा, दीपेंद्र हुड्डा, रणदीप सिंह सुरजेवाला, कुमारी सैलजा, बीरेंद्र सिंह समेत कई प्रमुख नेता मौजूद थे।

बैठक के दौरान भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने मुस्कुराते हुए कहा, "रणदीप सुरजेवाला मेरा साथ दे दें, फिर देखिए धमाका।" इस पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा, "मुझे आपका साथ देते हुए 20 साल हो गए, अब आपकी बारी है मेरा साथ देने की।" दोनों नेताओं के बीच हुई यह बातचीत भले ही हल्के अंदाज में हुई हो, लेकिन इसे हरियाणा कांग्रेस के भीतर मौजूद गुटीय राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

मामला तब और चर्चा में आ गया जब बैठक के अंदर की बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसके बाद मीडिया ने जब भूपेंद्र सिंह हुड्डा से इस मुद्दे पर सवाल किया तो उन्होंने किसी भी तरह के विवाद से इनकार करते हुए इसे महज मजाक बताया। हुड्डा ने कहा कि रणदीप सुरजेवाला उनके करीबी हैं और दोनों के बीच कोई मनमुटाव नहीं है।

हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हरियाणा कांग्रेस में लंबे समय से विभिन्न नेताओं के अलग-अलग शक्ति केंद्र रहे हैं। भूपेंद्र सिंह हुड्डा जहां राज्य में कांग्रेस का सबसे बड़ा चेहरा माने जाते हैं, वहीं रणदीप सिंह सुरजेवाला ने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई है और पिछले कुछ वर्षों में हरियाणा की राजनीति में भी उनका प्रभाव बढ़ा है।

बैठक के दौरान सुरजेवाला ने यह भी कहा कि हरियाणा के 56 वर्षों के इतिहास में कांग्रेस केवल तीन बार अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल कर पाई है। उन्होंने वोट प्रतिशत की चर्चा के दौरान यह भी टिप्पणी की कि केवल वोट शेयर से फर्क नहीं पड़ता, बल्कि विधानसभा में कितनी सीटें मिलती हैं, यह अधिक महत्वपूर्ण है। इस बयान को भी कई लोग राजनीतिक संदेश के रूप में देख रहे हैं।

हालांकि कांग्रेस नेतृत्व की ओर से बैठक का मुख्य उद्देश्य संगठन को मजबूत करना, कार्यकर्ताओं को एकजुट करना और जनहित के मुद्दों पर पार्टी की रणनीति तैयार करना बताया गया। लेकिन बैठक में दो वरिष्ठ नेताओं के बीच हुई यह नोकझोंक अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन चुकी है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस नेतृत्व इन आंतरिक मतभेदों को किस तरह संभालता है और आगामी चुनावी चुनौतियों के लिए पार्टी को कितनी मजबूती से एकजुट कर पाता है।