US-Iran Conflict: ईरान का आरोप- अमेरिका ने खामेनेई के अंतिम संस्कार को निशाना बनाया
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Middle East Crisis
IRGC ने अमेरिका पर मशहद रेलवे पुलों पर हमले का आरोप लगाया।
ईरान ने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर पलटवार का दावा किया।
बढ़ते तनाव के बीच पश्चिम एशिया की सुरक्षा को लेकर चिंता गहराई।
Tehran / अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। ताजा घटनाक्रम में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने आरोप लगाया है कि अमेरिकी सेना ने मशहद जाने वाले दो महत्वपूर्ण रेलवे पुलों को निशाना बनाया है। यह दावा ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान में पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर व्यापक तैयारियां चल रही हैं और लाखों लोग श्रद्धांजलि देने के लिए मशहद पहुंच रहे हैं।
ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, गोलिस्तान प्रांत में स्थित आक तेकेह खान रेलवे पुल पर तड़के हमला हुआ। आईआरजीसी का दावा है कि इस हमले में अमेरिकी क्रूज मिसाइल का इस्तेमाल किया गया। हमले के बाद दो जोरदार धमाकों की आवाज सुनाई दी और रेलवे मार्ग को अस्थायी रूप से प्रभावित होना पड़ा। हालांकि राहत की बात यह रही कि घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली है।
आईआरजीसी ने आरोप लगाया कि इन हमलों का उद्देश्य केवल सैन्य ढांचे को नुकसान पहुंचाना नहीं था, बल्कि मशहद में होने वाले अंतिम संस्कार कार्यक्रम को भी प्रभावित करना था। संगठन ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए उसे "विश्वासघाती" करार दिया और कहा कि ऐसे हमले ईरानी जनता के संकल्प को कमजोर नहीं कर सकते। आईआरजीसी ने चेतावनी दी कि इस कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा और क्षेत्र में अमेरिकी हितों को इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
दूसरी ओर अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा है कि उसकी हालिया सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की उन क्षमताओं को कमजोर करना है जो होर्मुज जलडमरूमध्य और क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि उसके हमले रणनीतिक सैन्य लक्ष्यों पर केंद्रित हैं।
इन घटनाओं के बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है। आईआरजीसी ने दावा किया है कि उसने जवाबी कार्रवाई के तहत कुवैत, बहरीन और कतर में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया। संगठन ने इसे अमेरिका के खिलाफ "पहला दंडात्मक चरण" बताया है। वहीं अमेरिकी और क्षेत्रीय अधिकारियों की ओर से इन दावों की अलग-अलग जांच की जा रही है।
इस बीच मशहद में पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर भारी भीड़ उमड़ रही है। ईरानी मीडिया के अनुसार, लाखों लोग श्रद्धांजलि देने के लिए सड़कों पर मौजूद हैं। सुरक्षा कारणों से कई मार्ग बंद कर दिए गए हैं और मशहद हवाई अड्डे पर भी विशेष प्रतिबंध लगाए गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच यह टकराव इसी तरह जारी रहा तो इसका असर पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा, वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होता है या यह संघर्ष और व्यापक रूप लेता है।