TMC Crisis: बागी गुट ने चुनाव आयोग से मांगी मान्यता, खुद को बताया असली तृणमूल कांग्रेस
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TMC Crisis
बागी TMC गुट ने चुनाव आयोग से पार्टी की मान्यता मांगी।
ऋतब्रत बनर्जी ने खुद को असली TMC का प्रतिनिधि बताया।
58 विधायक और 20 सांसदों के अलग होने से बढ़ा राजनीतिक संकट।
Kolkata / पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) का अंदरूनी संकट लगातार गहराता जा रहा है। गुरुवार को पार्टी के बागी गुट के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में चुनाव आयोग से मुलाकात कर खुद को "असली TMC" बताते हुए संगठनात्मक मान्यता की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात कर पार्टी में हुए हालिया बदलावों और नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी (NWC) को मान्यता देने का अनुरोध किया।
बैठक के बाद बागी गुट के नेता और पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि उन्होंने चुनाव आयोग के सामने अपना पक्ष विस्तार से रखा है। उनके अनुसार, पार्टी के अधिकांश विधायक और कई सांसद अब उनके साथ हैं, इसलिए वास्तविक राजनीतिक समर्थन उनके गुट के पास है। उन्होंने उम्मीद जताई कि चुनाव आयोग जल्द ही इस मामले पर फैसला करेगा।
इस राजनीतिक घटनाक्रम की शुरुआत 3 जून को हुई थी, जब TMC के 80 में से 58 विधायक ममता बनर्जी के नेतृत्व से अलग हो गए। इसके बाद 15 जून को पार्टी के 20 सांसदों ने भी TMC छोड़कर त्रिपुरा की नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी (NCPI) में विलय कर लिया। इन घटनाओं ने पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
22 जून को कोलकाता में बागी गुट की एक प्रतिनिधि बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में नए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी के गठन की घोषणा की गई। बागी नेताओं का दावा है कि पार्टी के अधिकांश निर्वाचित प्रतिनिधियों का समर्थन उन्हें प्राप्त है, इसलिए संगठन पर उनका अधिकार बनता है।
राजनीतिक विश्लेषक इस पूरे घटनाक्रम की तुलना महाराष्ट्र में 2022 में हुई शिवसेना की बगावत से कर रहे हैं। उस समय शिवसेना के अधिकांश विधायक एकनाथ शिंदे के साथ चले गए थे, जिसके बाद पार्टी के असली स्वरूप और चुनाव चिह्न को लेकर लंबी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई चली थी। अंततः चुनाव आयोग ने शिंदे गुट को पार्टी का आधिकारिक चुनाव चिह्न सौंप दिया था।
वर्तमान स्थिति में TMC की संसदीय और विधायी ताकत काफी प्रभावित हुई है। लोकसभा में पार्टी के 28 सांसदों में से 20 सांसद अलग हो चुके हैं, जिससे ममता बनर्जी के पास केवल 8 सांसद बचे हैं। राज्यसभा में भी 13 में से 4 सांसद इस्तीफा दे चुके हैं। वहीं विधानसभा में 80 विधायकों में से 58 विधायक बागी गुट के साथ बताए जा रहे हैं।
अब सभी की नजरें चुनाव आयोग के फैसले पर टिकी हैं। यदि आयोग बागी गुट के दावों को स्वीकार करता है, तो पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है और TMC के भविष्य की दिशा भी बदल सकती है।