Badrinath Temple Donation Scam: पूर्व टेंपल अधिकारी राजेंद्र सिंह चौहान गिरफ्तार
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Badrinath Temple Donation Scam
बदरीनाथ मंदिर चढ़ावा मामले में पूर्व टेंपल अधिकारी गिरफ्तार।
एसआईटी दान रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है।
मामले में पहले भी एक कर्मचारी की गिरफ्तारी और निलंबन हो चुका है।
चमोली/देहरादून। उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में चढ़ावे और दान से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के पूर्व टेंपल अधिकारी राजेंद्र सिंह चौहान को गिरफ्तार कर लिया है। इस कार्रवाई ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है और मंदिर प्रशासन में जवाबदेही को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार राजेंद्र सिंह चौहान 30 जून 2026 को अपने पद से सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के कुछ ही दिनों बाद एसआईटी ने उन्हें बदरीनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे की राशि से संबंधित कथित गड़बड़ियों और चोरी के आरोपों की जांच के सिलसिले में हिरासत में लिया। जांच एजेंसियों का मानना है कि मामले में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।
एसआईटी अधिकारियों के अनुसार, अब तक जुटाए गए साक्ष्यों और प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। फिलहाल राजेंद्र सिंह चौहान से विस्तृत पूछताछ की जा रही है और जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के बाद मामले में और भी अहम खुलासे होने की संभावना है।
यह मामला उस समय चर्चा में आया था जब सोशल मीडिया पर बदरीनाथ मंदिर में दान और चढ़ावे की गिनती के दौरान कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए गए। इसके बाद ‘भैरव सेना’ नामक संगठन ने भी प्रशासन से शिकायत कर मामले की निष्पक्ष जांच और एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। बढ़ते विवाद और जनदबाव को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने पिछले सप्ताह तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया था।
गढ़वाल मंडल के आयुक्त की अध्यक्षता में गठित इस समिति को पूरे मामले की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपने की जिम्मेदारी दी गई है। समिति ने अपनी 18 पृष्ठों की प्रारंभिक रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। इनमें चढ़ावे की गिनती के दौरान निर्धारित ड्रेस कोड लागू करना, गिनती केंद्रों पर अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाना, निगरानी व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाना तथा श्रद्धालुओं की भागीदारी सुनिश्चित करना शामिल है।
इस मामले में इससे पहले भी कार्रवाई हो चुकी है। बीकेटीसी अध्यक्ष कार्यालय में तैनात निजी सहायक प्रमोद नौटियाल को प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर निलंबित किया गया था। बाद में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर 13 जुलाई को गिरफ्तार कर लिया गया। वहीं, मंदिर के कोषाध्यक्ष का तबादला भी किया गया, क्योंकि चढ़ावे के रजिस्टर में कथित ओवरराइटिंग और रिकॉर्ड में विसंगतियों के मामले सामने आए थे।
चमोली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने बताया कि मंदिर समिति के अधिकारी युधवीर फरस्वान की शिकायत के आधार पर 8 जुलाई को बदरीनाथ पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद जांच तेज की गई और एसआईटी को पूरे मामले की जिम्मेदारी सौंपी गई।
अब जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित घोटाले में केवल कुछ कर्मचारी शामिल थे या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था। एसआईटी पुराने सीसीटीवी फुटेज की भी गहन जांच कर रही है। साथ ही कथित तौर पर डिलीट किए गए फुटेज को तकनीकी सहायता से रिकवर करने की कोशिशें जारी हैं।
श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस संवेदनशील मामले पर पूरे राज्य की नजर बनी हुई है। जांच के अगले चरण में और गिरफ्तारियां या नए खुलासे सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है। राज्य सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और मंदिर की दान व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।