PFI Terror Case: पटियाला हाउस कोर्ट ने 20 आरोपियों पर तय किए आरोप

Sat 11-Jul-2026,11:43 PM IST +05:30

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PFI Terror Case: पटियाला हाउस कोर्ट ने 20 आरोपियों पर तय किए आरोप PFI Terror Case
  • PFI और उसके 20 पदाधिकारियों के खिलाफ अदालत ने आरोप तय किए।

  • एनआईए ने आतंकी साजिश, फंडिंग और प्रशिक्षण शिविरों के आरोप लगाए।

  • मामले में 29 जुलाई से ट्रायल की प्रक्रिया शुरू होगी।

Delhi / Delhi :

Delhi / प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) से जुड़े कथित आतंकी साजिश मामले में दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए संगठन और उसके 20 पदाधिकारियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिए हैं। विशेष एनआईए जज प्रशांत शर्मा की अदालत ने शनिवार को सभी आरोपियों को ट्रायल का सामना करने का निर्देश दिया। हालांकि, सभी आरोपियों ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों से इनकार किया है।

यह मामला लंबे समय से जांच के दायरे में था। इससे पहले 5 जून को अदालत ने पीएफआई और उसके शीर्ष नेताओं के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था। आरोपियों में संगठन के संस्थापक अध्यक्ष ई. अबूबकर, चेयरमैन ओएमए सलाम और कई अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हैं। इन पर देश के खिलाफ साजिश रचने, आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने, फंड जुटाने, प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने और युवाओं को कट्टरपंथ की ओर प्रेरित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के अनुसार, जांच के दौरान ऐसे कई साक्ष्य सामने आए जिनसे यह संकेत मिला कि संगठन के कुछ सदस्य और पदाधिकारी कथित रूप से देश की आंतरिक सुरक्षा को प्रभावित करने वाली गतिविधियों में शामिल थे। एजेंसी का आरोप है कि पीएफआई के माध्यम से युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा की ओर आकर्षित किया जा रहा था और विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने की कोशिश की जा रही थी। जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि कुछ प्रमुख राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) नेताओं को निशाना बनाने की कथित योजनाओं के संकेत भी मिले थे।

एनआईए ने अपनी जांच पूरी करने के बाद मुख्य आरोपपत्र और पूरक आरोपपत्र अदालत में दाखिल किए थे। इन्हीं दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोप तय करने का फैसला लिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री से प्रथम दृष्टया यह आशंका बनती है कि आरोपी और संगठन के कुछ सदस्य भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ गतिविधियों में संलिप्त हो सकते हैं।

यह मामला सबसे पहले 13 अप्रैल 2022 को गृह मंत्रालय के निर्देश पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा दर्ज किया गया था। इसके बाद देशभर में कई स्थानों पर छापेमारी और जांच अभियान चलाए गए। जांच के दौरान बड़ी मात्रा में दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और अन्य सामग्री जुटाई गई, जिन्हें अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

अब अदालत ने मामले को ट्रायल के लिए सूचीबद्ध कर दिया है। 29 जुलाई से अभियोजन पक्ष के साक्ष्य दर्ज किए जाएंगे और सुनवाई का अगला चरण शुरू होगा। इस बहुचर्चित मामले पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि ट्रायल के दौरान सामने आने वाले साक्ष्य और गवाहों की गवाही मामले की दिशा तय करेंगे। फिलहाल सभी आरोपी न्यायिक प्रक्रिया का सामना करेंगे और अदालत में अपने पक्ष को प्रस्तुत करेंगे।