Mahadev Betting App Case: विकास गर्ग कौन हैं? महादेव ऐप मामले में ED की ₹940 करोड़ की बड़ी कार्रवाई

Fri 10-Jul-2026,04:07 PM IST +05:30

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Mahadev Betting App Case: विकास गर्ग कौन हैं? महादेव ऐप मामले में ED की ₹940 करोड़ की बड़ी कार्रवाई Mahadev Betting App Case
  • ED ने विकास गर्ग और उनकी कंपनियों की ₹940.77 करोड़ की संपत्तियां कुर्क कीं।

  • महादेव ऑनलाइन बुक और स्काईएक्सचेंज से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क की जांच जारी।

  • मामले में अब तक कुल ₹3,800 करोड़ की संपत्तियां अटैच, जब्त या फ्रीज़ की जा चुकी हैं।

Maharashtra / Mumbai :

Mumbai / देश के सबसे चर्चित और बहुचर्चित ऑनलाइन सट्टेबाजी मामलों में शामिल महादेव ऑनलाइन बुक केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। रायपुर ज़ोनल कार्यालय ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत एक नया प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी करते हुए कारोबारी विकास गर्ग, उनके परिवार के सदस्यों तथा उनके नियंत्रण वाली कंपनियों की लगभग 940.77 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां कुर्क कर ली हैं।

ईडी की इस कार्रवाई ने एक बार फिर महादेव बेटिंग नेटवर्क, उसके आर्थिक तंत्र और उससे जुड़े कारोबारी संबंधों को राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। जांच एजेंसी का दावा है कि यह संपत्ति अवैध सट्टेबाजी से अर्जित धन से जुड़ी हुई है, जिसे विभिन्न कंपनियों और वित्तीय संरचनाओं के माध्यम से वैध दिखाने का प्रयास किया गया।

क्या है पूरा मामला?
महादेव ऑनलाइन बुक और स्काईएक्सचेंज को देश के सबसे बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्कों में गिना जाता है। जांच एजेंसियों के अनुसार यह नेटवर्क भारत के बाहर से संचालित किया जाता था और फ्रैंचाइज़ी आधारित "पैनल सिस्टम" के जरिए देशभर में अपना कारोबार फैलाता था।

इस मामले की जांच कई राज्यों में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई। छत्तीसगढ़ के दुर्ग पुलिस स्टेशन में दर्ज प्राथमिकी के अलावा आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में भी इस नेटवर्क से जुड़े लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जालसाजी के मामले दर्ज किए गए थे।

इन शिकायतों के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच शुरू की और धीरे-धीरे इस नेटवर्क के वित्तीय ढांचे तक पहुंच बनाई।

हर महीने 450 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई
जांच एजेंसी के अनुसार महादेव ऑनलाइन बुक और स्काईएक्सचेंज का नेटवर्क केवल एक साधारण सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म नहीं था, बल्कि यह एक संगठित आर्थिक तंत्र की तरह काम कर रहा था।

ईडी की जांच में सामने आया कि इस नेटवर्क के जरिए हर महीने 450 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई की जा रही थी। यह रकम ऑनलाइन सट्टेबाजी, गेमिंग और विभिन्न प्रकार की अवैध गतिविधियों से प्राप्त की जाती थी।

जांच में यह भी पता चला कि इस धन को सीधे उपयोग में नहीं लाया जाता था, बल्कि कई स्तरों पर वित्तीय लेन-देन के जरिए उसे वैध रूप देने की कोशिश की जाती थी।

शेल कंपनियों के जरिए हुआ मनी लॉन्ड्रिंग का खेल
ईडी के अनुसार अवैध कमाई को वैध दिखाने के लिए शेल कंपनियों का एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया गया था।

जांच में पाया गया कि कई फर्जी या निष्क्रिय कंपनियों के माध्यम से धन को एक खाते से दूसरे खाते में भेजा गया। इस प्रक्रिया को "लेयरिंग" कहा जाता है, जिसका उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग में आमतौर पर किया जाता है।

एजेंसी का दावा है कि करीब 940.77 करोड़ रुपये की राशि को इसी तरह विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से घुमाकर विकास गर्ग के नियंत्रण वाली कंपनियों तक पहुंचाया गया। बाद में इस धन का उपयोग शेयर खरीदने, निवेश करने और अन्य संपत्तियां अर्जित करने में किया गया।

किन संपत्तियों को किया गया कुर्क?
ईडी द्वारा जारी प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के तहत कई प्रकार की चल और अचल संपत्तियों को जब्त किया गया है।

इनमें शामिल हैं:
रिहायशी और व्यावसायिक संपत्तियां
विभिन्न स्थानों पर स्थित भूमि के टुकड़े
कंपनियों के इक्विटी शेयर
सिक्योरिटीज़ और अन्य वित्तीय निवेश
विभिन्न कंपनियों में हिस्सेदारी

ईडी का कहना है कि ये सभी संपत्तियां कथित तौर पर अवैध धन से अर्जित की गई हैं और इसलिए इन्हें जांच पूरी होने तक कुर्क किया गया है।

कौन हैं विकास गर्ग?
विकास गर्ग कॉरपोरेट जगत का एक जाना-पहचाना नाम हैं। वे एराया लाइफस्पेस, विकास लाइफकेयर और विकास इकोटेक जैसी सूचीबद्ध कंपनियों के प्रमोटर माने जाते हैं।

वर्ष 2024 में वे उस समय राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए थे, जब उनकी कंपनी एराया लाइफस्पेस ने अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनी एबिक्स (Ebix) के अधिग्रहण की घोषणा की थी।

यह सौदा काफी हाई-प्रोफाइल माना गया था क्योंकि एबिक्स वित्तीय सेवा क्षेत्र को तकनीकी समाधान प्रदान करने वाली एक बड़ी कंपनी थी। हालांकि बाद में एबिक्स ने अमेरिका में दिवालियापन संरक्षण के लिए आवेदन किया, जिसके बाद यह अधिग्रहण भी चर्चा और विवाद का विषय बन गया।

एबिक्स सौदे पर भी उठे सवाल
ईडी का आरोप है कि महादेव बेटिंग ऐप से जुड़े कथित अवैध धन का इस्तेमाल एबिक्स अधिग्रहण सौदे को आगे बढ़ाने में किया गया।

जांच एजेंसी के मुताबिक लगभग 940 करोड़ रुपये की राशि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के माध्यम से एराया लाइफस्पेस में लाई गई। इसके बाद इस धन का उपयोग अधिग्रहण प्रक्रिया और अन्य कारोबारी गतिविधियों में किया गया।

यदि जांच में यह आरोप साबित होता है तो यह भारत के कॉरपोरेट इतिहास के सबसे चर्चित मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में से एक बन सकता है।

पहले भी विवादों में रह चुके हैं विकास गर्ग
यह पहला अवसर नहीं है जब विकास गर्ग का नाम किसी जांच एजेंसी की कार्रवाई से जुड़ा हो।

नवंबर 2025 में कथित कस्टम धोखाधड़ी मामले में ईडी ने उनके कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। इसके अलावा भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने भी वर्ष 2024 में टेकओवर नियमों से जुड़े कथित खुलासा उल्लंघन के मामले में उन पर जुर्माना लगाया था।

कुछ निवेशकों ने कॉरपोरेट गवर्नेंस और प्रबंधन से जुड़े मुद्दों को लेकर भी नियामकीय संस्थाओं के समक्ष शिकायतें दर्ज कराई थीं।

अब तक कितनी संपत्तियां जब्त हो चुकी हैं?
महादेव ऑनलाइन बुक मामले में ईडी की कार्रवाई लगातार जारी है। इससे पहले इस मामले में सात प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किए जा चुके हैं।

जांच एजेंसी के अनुसार पहले ही लगभग 2,825 करोड़ रुपये मूल्य की चल और अचल संपत्तियां अटैच, जब्त या फ्रीज़ की जा चुकी थीं। इनमें देश और विदेश दोनों जगहों की संपत्तियां शामिल हैं।

अब 940.77 करोड़ रुपये की नई कुर्की के बाद इस मामले में कुल अटैच, जब्त और फ्रीज़ की गई संपत्तियों का मूल्य बढ़कर लगभग 3,800 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

आगे क्या होगा?
ईडी द्वारा की गई यह कार्रवाई अभी जांच प्रक्रिया का हिस्सा है। मामले में विशेष पीएमएलए अदालत के समक्ष अभियोजन शिकायतें दायर की जा चुकी हैं और अदालत मनी लॉन्ड्रिंग अपराध का संज्ञान भी ले चुकी है।

आने वाले समय में जांच एजेंसियां धन के स्रोत, निवेश के मार्ग, विदेशी फंडिंग संरचनाओं और संबंधित कंपनियों की भूमिका की और गहराई से जांच कर सकती हैं। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ और भी सख्त कानूनी कार्रवाई संभव है।

निष्कर्ष
महादेव ऑनलाइन बुक मामला केवल अवैध सट्टेबाजी का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह अब हजारों करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क, शेल कंपनियों, विदेशी निवेश संरचनाओं और बड़े कॉरपोरेट सौदों से जुड़ा एक जटिल आर्थिक अपराध बन चुका है। विकास गर्ग की 940.77 करोड़ रुपये की संपत्तियों की कुर्की इस बात का संकेत है कि जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की वित्तीय परतों को एक-एक कर उजागर करने में जुटी हुई हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।