दिल्ली में मन्नथु पद्मनाभन की प्रतिमा का अनावरण, उपराष्ट्रपति ने दी श्रद्धांजलि

Sun 12-Jul-2026,11:28 PM IST +05:30

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दिल्ली में मन्नथु पद्मनाभन की प्रतिमा का अनावरण, उपराष्ट्रपति ने दी श्रद्धांजलि NSS Delhi
  • उपराष्ट्रपति ने मन्नथु पद्मनाभन की प्रतिमा का अनावरण और स्मृति मंडपम का उद्घाटन किया।

  • सामाजिक न्याय, शिक्षा और राष्ट्रीय सेवा में उनके योगदान को याद किया गया।

  • ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।

Delhi / Delhi :

Delhi / भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने नई दिल्ली के द्वारका स्थित मन्नम इंटरनेशनल सेंटर में समाज सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी मन्नथु पद्मनाभन की प्रतिमा का अनावरण किया। इस अवसर पर उन्होंने नायर सर्विस सोसाइटी (एनएसएस) द्वारा स्थापित मन्नम स्मृति मंडपम का भी उद्घाटन किया। समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने इसे आधुनिक भारत के एक महान समाज सुधारक और राष्ट्रनिर्माता की अमर विरासत को समर्पित ऐतिहासिक अवसर बताया।

उपराष्ट्रपति ने नायर सर्विस सोसाइटी को इस महत्वपूर्ण परियोजना को साकार करने के लिए बधाई देते हुए कहा कि मन्नम स्मृति मंडपम केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि एक ऐसे महान व्यक्तित्व को समर्पित जीवंत श्रद्धांजलि है, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन समाज सुधार, शिक्षा और राष्ट्रीय सेवा के लिए समर्पित किया। उन्होंने कहा कि मन्नथु पद्मनाभन के आदर्श जाति, धर्म और क्षेत्रीय सीमाओं से ऊपर उठकर पूरे समाज को प्रेरित करते हैं।

मन्नथु पद्मनाभन के योगदान को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि वे केवल एक सामाजिक नेता नहीं थे, बल्कि सामुदायिक पुनर्जागरण के अग्रदूत थे। उन्होंने शिक्षा, आत्मनिर्भरता और सामाजिक जागरूकता को समाज परिवर्तन का आधार माना। श्री राधाकृष्णन ने कहा कि उनका विश्वास था कि प्रत्येक व्यक्ति को समान सम्मान और समान अवसर मिलना चाहिए। यही सोच उन्हें एक दूरदर्शी समाज सुधारक बनाती है।

उन्होंने कहा कि मन्नथु पद्मनाभन का जीवन इस बात का उदाहरण है कि सच्चे नेतृत्व का उद्देश्य केवल किसी एक समुदाय का उत्थान नहीं, बल्कि पूरे समाज को आगे बढ़ाना होता है। उनके प्रयासों से हजारों लोगों को शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और आत्मविश्वास प्राप्त हुआ। उपराष्ट्रपति ने कहा कि न्याय, करुणा और समावेशिता के मूल्यों पर आधारित समाज ही वास्तविक प्रगति का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

कार्यक्रम में बोलते हुए उपराष्ट्रपति ने नायर सर्विस सोसाइटी की उपलब्धियों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि एक सदी से अधिक समय पहले शुरू हुआ यह संगठन आज सामाजिक सेवा, शिक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। विशेष रूप से दिल्ली-एनसीआर में संगठन की 25 शाखाओं और लगभग 25,000 सदस्यों की सक्रिय भागीदारी इसकी निरंतर प्रगति को दर्शाती है।

उन्होंने केरल की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में एनएसएस दिल्ली के प्रयासों की भी प्रशंसा की। कलरिपयट्टू, कथकली और मोहिनीअट्टम जैसी पारंपरिक कलाओं को बढ़ावा देने के साथ-साथ संगठन शिक्षा और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दे रहा है।

स्मारकों के महत्व पर अपने विचार व्यक्त करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि स्मारक केवल पत्थर या धातु से बनी संरचनाएं नहीं होते, बल्कि वे समाज की सामूहिक स्मृति और मूल्यों के प्रतीक होते हैं। वे आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करने और महान व्यक्तित्वों के आदर्शों को जीवित रखने का कार्य करते हैं।

उन्होंने लोगों से मन्नथु पद्मनाभन के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि समानता, शिक्षा, करुणा, सेवा और राष्ट्रीय एकता पर आधारित समाज का निर्माण ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत मन्नम इंटरनेशनल सेंटर परिसर में एक पौधा भी लगाया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए अधिक से अधिक लोगों से इस अभियान में भाग लेने की अपील की।