दिल्ली हाई कोर्ट से समीर वानखेड़े को झटका

Thu 29-Jan-2026,04:40 PM IST +05:30

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दिल्ली हाई कोर्ट से समीर वानखेड़े को झटका Sameer-Wankhede-Delhi-HC-Netflix-Defamation-Case
  • दिल्ली हाई कोर्ट ने अधिकार क्षेत्र के अभाव में समीर वानखेड़े की नेटफ्लिक्स और रेड चिलीज के खिलाफ मानहानि याचिका खारिज की।

  • कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सक्षम न्यायालय में जाने की छूट देते हुए सभी अंतरिम राहत आवेदन भी खारिज कर दिए।

Delhi / Delhi :

Delhi/ आईआरएस अधिकारी और पूर्व नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) अधिकारी समीर वानखेड़े को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ा कानूनी झटका लगा है। गुरुवार को कोर्ट ने नेटफ्लिक्स और शाहरुख खान की प्रोडक्शन कंपनी रेड चिलीज एंटरटेनमेंट के खिलाफ दायर उनकी मानहानि याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। यह याचिका आर्यन खान प्रकरण से जुड़े कथित कंटेंट पर आधारित वेब सीरीज ‘द बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ को लेकर दाखिल की गई थी।

दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस पुरुशैन्द्र कुमार कौरव ने स्पष्ट किया कि इस मामले में अदालत के पास क्षेत्राधिकार (टेरिटोरियल जूरिस्डिक्शन) नहीं है। कोर्ट ने याचिका को सुनवाई योग्य न मानते हुए वापस कर दिया और याचिकाकर्ता को सक्षम न्यायालय में जाने की स्वतंत्रता दी। इसके साथ ही अंतरिम राहत से जुड़े सभी आवेदन भी खारिज कर दिए गए।

सुनवाई के दौरान अदालत ने सबसे पहले यह तय किया कि क्या यह मामला दिल्ली हाई कोर्ट में सुना जा सकता है या नहीं। कोर्ट ने माना कि समीर वानखेड़े मुंबई में रहते हैं और प्रतिवादी कंपनियों का पंजीकृत कार्यालय भी मुंबई में है, इसलिए दिल्ली में याचिका दायर करने का आधार पर्याप्त नहीं है।

वानखेड़े की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जे. साई दीपक ने दलील दी कि उनके रिश्तेदार दिल्ली में रहते हैं और उनसे जुड़ी कुछ विभागीय कार्यवाहियां भी राजधानी में हुई थीं, जिससे दिल्ली हाई कोर्ट को अधिकार क्षेत्र प्राप्त होता है। हालांकि, कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।

रेड चिलीज एंटरटेनमेंट की ओर से वरिष्ठ वकील नीरज किशन कौल और नेटफ्लिक्स की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव नैयर ने याचिका की मेंटेनेबिलिटी पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि वेब सीरीज का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि व्यंग्य और डार्क कॉमेडी के माध्यम से फिल्म इंडस्ट्री की संस्कृति को दिखाना है।

समीर वानखेड़े ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि वेब सीरीज के कुछ दृश्य उनकी छवि को नुकसान पहुंचाते हैं। विशेष रूप से एक दृश्य में ‘सत्यमेव जयते’ कहने के बाद अशोभनीय इशारा दिखाने पर उन्होंने राष्ट्रीय सम्मान के अपमान का भी आरोप लगाया था। इसी आधार पर उन्होंने 2 करोड़ रुपये की मानहानि क्षतिपूर्ति की मांग की थी।

इस मामले में वानखेड़े ने रेड चिलीज एंटरटेनमेंट, नेटफ्लिक्स, गूगल एलएलसी, मेटा प्लेटफॉर्म्स, आरपीजी लाइफस्टाइल मीडिया और जॉन डो को प्रतिवादी बनाया था। अब कोर्ट के आदेश के बाद वानखेड़े को किसी अन्य सक्षम अदालत का रुख करना होगा।