भारत में CSPOC 2026 सफल, वैश्विक संसदीय नेतृत्व में मजबूत हुई भूमिका

Thu 29-Jan-2026,04:52 PM IST +05:30

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भारत में CSPOC 2026 सफल, वैश्विक संसदीय नेतृत्व में मजबूत हुई भूमिका csopc-2026-India-Successful-Parliamentary-Conference
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया और सांसदों की सुरक्षा जैसे आधुनिक विषयों पर गहन अंतरराष्ट्रीय विमर्श हुआ।

  • द्विपक्षीय बैठकों में भारत के संसदीय मॉडल की सराहना, सहयोग और मित्रता बढ़ाने पर सहमति बनी।

Delhi / :

Delhi/ लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने सदन को जानकारी दी कि भारत ने 28वें कॉमनवेल्थ स्पीकर्स और पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन (CSPOC) 2026 का सफल आयोजन कर वैश्विक संसदीय मंच पर अपनी मजबूत लोकतांत्रिक पहचान को और सुदृढ़ किया है। 16 वर्षों के अंतराल के बाद भारत में आयोजित यह सम्मेलन संसदीय कूटनीति, नवाचार और सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

लोकसभा अध्यक्ष ने बताया कि 28वां CSPOC सम्मेलन 14 से 16 जनवरी 2026 के बीच नई दिल्ली में आयोजित हुआ। इसका औपचारिक उद्घाटन 15 जनवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐतिहासिक संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में किया। सम्मेलन में 53 राष्ट्रमंडल देशों और 14 अर्ध-स्वायत्त संसदों के अध्यक्षों व पीठासीन अधिकारियों ने भाग लिया। कुल 60 स्पीकर्स और लगभग 200 प्रतिनिधियों की भागीदारी के साथ यह अब तक का सबसे व्यापक CSPOC सम्मेलन रहा।

सम्मेलन में लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने में स्पीकर्स की भूमिका, संसद में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग, सोशल मीडिया का सांसदों पर प्रभाव, संसद के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने की रणनीतियाँ और सांसदों व संसदीय कर्मचारियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण जैसे समकालीन विषयों पर गहन चर्चा हुई।

इस अवसर पर इंटर-पार्लियामेंट्री यूनियन (IPU) की अध्यक्ष डॉ. तुलिया एक्सन और कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन (CPA) के चेयरपर्सन डॉ. क्रिस्टोफर कलिला विशेष आमंत्रित के रूप में शामिल हुए। सम्मेलन के दौरान श्री ओम बिरला ने 40 से अधिक देशों के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय वार्ताएं कीं, जिनमें भारत के संसदीय लोकतंत्र की सराहना की गई और सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई गई।

CSPOC की परंपरा के अनुरूप, सम्मेलन के समापन के बाद 17 जनवरी 2026 को विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के लिए जयपुर भ्रमण आयोजित किया गया, जिससे भारत की सांस्कृतिक विरासत और अतिथि-सत्कार की वैश्विक छवि और सशक्त हुई।