चारधाम हेली बुकिंग के नाम पर साइबर ठगी का भंडाफोड़, बिहार से दो आरोपी गिरफ्तार

Wed 01-Jul-2026,04:19 PM IST +05:30

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चारधाम हेली बुकिंग के नाम पर साइबर ठगी का भंडाफोड़, बिहार से दो आरोपी गिरफ्तार Char Dham Yatra Helicopter Booking Scam
  • चारधाम हेली सेवा बुकिंग के नाम पर साइबर ठगी करने वाले दो आरोपी गिरफ्तार।

  • फर्जी सोशल मीडिया पेज और व्हाट्सएप नंबर के जरिए श्रद्धालुओं को बनाया जाता था शिकार।

  • STF को कई राज्यों में फैले बड़े साइबर नेटवर्क के सुराग मिले।

Uttarakhand / Dehradun :

Dehradun / उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को हेलीकॉप्टर सेवा की फर्जी बुकिंग के नाम पर ठगने वाले एक बड़े साइबर गिरोह का स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने पर्दाफाश किया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर चारधाम यात्रा को साइबर अपराध मुक्त बनाने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत एसटीएफ ने बिहार के नालंदा जिले से दो शातिर साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के बाद देशभर में फैले एक बड़े साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े कई अहम सुराग भी सामने आए हैं।

एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह के अनुसार, चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को ऑनलाइन ठगी से बचाने के लिए एंटी हेली फ्रॉड सेल लगातार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, संदिग्ध वेबसाइटों और डिजिटल माध्यमों पर निगरानी रख रही थी। जांच के दौरान पता चला कि एक संगठित गिरोह फर्जी फेसबुक पेज, व्हाट्सएप नंबर और बैंक खातों का इस्तेमाल कर खुद को अधिकृत हेलीकॉप्टर सेवा एजेंट बताता था और श्रद्धालुओं से लाखों रुपये की ठगी करता था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून में मुकदमा दर्ज किया गया और जांच शुरू हुई। तकनीकी विश्लेषण, बैंक खातों की पड़ताल और मोबाइल डेटा के आधार पर एसटीएफ की टीम ने करीब एक सप्ताह तक बिहार में अभियान चलाया। इसके बाद बिहार शरीफ निवासी दीपक कुमार और शेखपुरा निवासी विजित कुमार उर्फ मिकी को गिरफ्तार कर लिया गया।

जांच में सामने आया कि दोनों आरोपियों ने कई श्रद्धालुओं को फर्जी हेलीकॉप्टर टिकट उपलब्ध कराने का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी की थी। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि उनका गिरोह सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए लोगों तक पहुंचता था। “वीआईपी दर्शन”, “तुरंत कन्फर्म टिकट” और “सीमित सीटें उपलब्ध” जैसे आकर्षक संदेश भेजकर श्रद्धालुओं को फंसाया जाता था।

ठगी से प्राप्त रकम अलग-अलग बैंक खातों में जमा कराई जाती थी। इन खातों का उपयोग ‘म्यूल अकाउंट’ के रूप में किया जाता था, जिसके बाद एटीएम के जरिए नकदी निकालकर गिरोह के सदस्यों के बीच 15 से 25 प्रतिशत कमीशन के आधार पर बांट दी जाती थी। जांच में यह भी पता चला कि इस नेटवर्क के तार बिहार में दर्ज अन्य साइबर धोखाधड़ी के मामलों से भी जुड़े हुए हैं।

एसटीएफ की जांच में एक और चिंताजनक तथ्य सामने आया है। प्रारंभिक जांच के अनुसार, साइबर अपराधी अपने नेटवर्क में नाबालिग बच्चों का भी इस्तेमाल कर रहे थे। इसके अलावा आरोपी अपनी पहचान छिपाने के लिए अनजान लोगों के मोबाइल हॉटस्पॉट और इंटरनेट कनेक्शन का उपयोग करते थे, ताकि उनकी वास्तविक लोकेशन और डिजिटल पहचान ट्रेस न हो सके।

राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी आरोपियों के बैंक खातों से संबंधित कई शिकायतें दर्ज मिली हैं। मोबाइल फोन और व्हाट्सएप चैट की जांच में बैंक खातों, एटीएम कार्ड और क्यूआर कोड के आदान-प्रदान से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य बरामद हुए हैं। पुलिस का मानना है कि यह नेटवर्क कई राज्यों में सक्रिय है और बड़े स्तर पर साइबर ठगी को अंजाम दे रहा था।

एसटीएफ ने आरोपियों के पास से पांच बैंक पासबुक, एक चेकबुक, दो मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य डिजिटल दस्तावेज बरामद किए हैं। एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि अब तक 300 से अधिक फर्जी सोशल मीडिया लिंक और 100 से ज्यादा संदिग्ध व्हाट्सएप नंबर ब्लॉक कराए जा चुके हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की है कि हेलीकॉप्टर टिकट की बुकिंग केवल अधिकृत पोर्टल और सरकारी वेबसाइटों के माध्यम से ही करें तथा किसी भी अनजान लिंक या एजेंट पर भरोसा न करें।