भारतीय नौसेना के युद्धपोत थाईलैंड से रवाना, दक्षिण-पूर्व एशिया में बढ़ेगा रणनीतिक सहयोग

Tue 30-Jun-2026,11:28 PM IST +05:30

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भारतीय नौसेना के युद्धपोत थाईलैंड से रवाना, दक्षिण-पूर्व एशिया में बढ़ेगा रणनीतिक सहयोग INS Udaygiri और INS Kavaratti ने पूरा किया थाईलैंड दौरा
  • भारतीय युद्धपोतों ने थाईलैंड दौरा पूरा कर दक्षिण-पूर्व एशिया की ओर प्रस्थान किया।

  • भारत और थाईलैंड के बीच समुद्री सहयोग एवं रणनीतिक साझेदारी मजबूत हुई।

  • क्षेत्रीय सुरक्षा और महासागर विजन को बढ़ावा देने पर विशेष जोर।

Maharashtra / Mumbai :

Mumbai / भारतीय नौसेना का पूर्वी बेड़ा दक्षिण-पूर्व एशिया में अपनी रणनीतिक मौजूदगी को और मजबूत करने की दिशा में लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहा है। इसी क्रम में भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस उदयगिरि, आईएनएस कवरत्ती और आईएनएस शक्ति ने थाईलैंड के सट्टाहीप बंदरगाह पर अपनी निर्धारित यात्रा सफलतापूर्वक पूरी करने के बाद दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में आगे की परिचालन तैनाती के लिए प्रस्थान कर दिया है। इस पूरे अभियान का नेतृत्व पूर्वी बेड़े के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग रियर एडमिरल आलोक आनंद कर रहे हैं।

भारतीय नौसेना की यह यात्रा केवल एक औपचारिक नौसैनिक पड़ाव नहीं थी, बल्कि भारत और थाईलैंड के बीच वर्षों से विकसित हो रहे समुद्री सहयोग, रणनीतिक विश्वास और रक्षा साझेदारी को नई मजबूती देने का महत्वपूर्ण अवसर भी साबित हुई। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते सामरिक परिदृश्य के बीच दोनों देशों के बीच बढ़ता सहयोग क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सट्टाहीप बंदरगाह पर प्रवास के दौरान भारतीय नौसेना और रॉयल थाई नेवी के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच कई महत्वपूर्ण बैठकें और विचार-विमर्श आयोजित किए गए। इन चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय नौसैनिक सहयोग को और अधिक मजबूत बनाना, परिचालन स्तर पर तालमेल बढ़ाना तथा समुद्री सुरक्षा से जुड़े साझा हितों पर सहयोग को विस्तारित करना था। दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय चुनौतियों, समुद्री निगरानी, आपदा प्रबंधन, मानवीय सहायता और समुद्री कानूनों के पालन जैसे विषयों पर भी विचार साझा किए।

यात्रा के दौरान भारतीय और थाई नौसेना के अधिकारियों एवं जवानों ने विभिन्न पेशेवर आदान-प्रदान कार्यक्रमों में भाग लिया। इनमें परिचालन संबंधी चर्चाएं, प्रशिक्षण गतिविधियां, अनुभव साझा करने के सत्र और खेलकूद प्रतियोगिताएं शामिल थीं। इन कार्यक्रमों ने दोनों नौसेनाओं के बीच आपसी समझ, विश्वास और पेशेवर संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सट्टाहीप बंदरगाह पर भारतीय युद्धपोत आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस कवरत्ती पर एक विशेष स्वागत समारोह का भी आयोजन किया गया। इस समारोह में थाईलैंड में भारत के राजदूत, रॉयल थाई नेवी के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न देशों के राजनयिक प्रतिनिधि तथा थाईलैंड में रहने वाले भारतीय समुदाय के प्रमुख सदस्य शामिल हुए। इस अवसर पर दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों और साझा समुद्री हितों पर विशेष बल दिया गया।

भारतीय नौसेना की यह तैनाती प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रस्तुत “महासागर” (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इस पहल का उद्देश्य हिंद महासागर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा, विकास, सहयोग और स्थिरता को बढ़ावा देना है। भारत लगातार ऐसे समुद्री वातावरण के निर्माण की दिशा में कार्य कर रहा है जहां सभी देशों को समान अवसर मिले और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था कायम रहे।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की नौसैनिक यात्राएं केवल सैन्य सहयोग तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि वे कूटनीतिक संबंधों, आर्थिक साझेदारी और क्षेत्रीय विश्वास निर्माण को भी नई ऊर्जा प्रदान करती हैं। भारतीय नौसेना की यह यात्रा भारत और थाईलैंड के बीच गहरे समुद्री सहयोग, पारस्परिक सम्मान और दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी का मजबूत उदाहरण है। साथ ही यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी स्पष्ट रूप से दर्शाती है।