जनरल उपेंद्र द्विवेदी हुए सेवानिवृत्त, सेना के आधुनिकीकरण को दी नई दिशा

Tue 30-Jun-2026,11:52 PM IST +05:30

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जनरल उपेंद्र द्विवेदी हुए सेवानिवृत्त, सेना के आधुनिकीकरण को दी नई दिशा Upendra Dwivedi
  • जनरल उपेंद्र द्विवेदी चार दशक से अधिक की सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए।

  • सेना के आधुनिकीकरण, तकनीकी उन्नयन और संयुक्त सैन्य समन्वय को बढ़ावा दिया।

  • सैनिकों, पूर्व सैनिकों और वीर नारियों के कल्याण पर विशेष ध्यान दिया।

Delhi / Delhi :

Delhi / भारतीय सेना के प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी मंगलवार को चार दशकों से अधिक की गौरवशाली सैन्य सेवा के बाद सेनाध्यक्ष (Chief of Army Staff) पद से सेवानिवृत्त हो गए। उनके कार्यकाल को सेना के आधुनिकीकरण, परिचालन तत्परता, तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय और सैनिक कल्याण को नई दिशा देने के लिए याद किया जाएगा।

सेना प्रमुख के रूप में जनरल द्विवेदी ने राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनके नेतृत्व में भारतीय सेना ने उत्तरी सीमाओं पर ऑपरेशन स्नो लेपर्ड के तहत मजबूत और सतर्क उपस्थिति बनाए रखी, जबकि पश्चिमी सीमाओं पर भी सेना ने पूरी तैयारी और पेशेवर दक्षता के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। उनके कार्यकाल में ऑपरेशन सिंदूर भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रहा, जिसने भारतीय सेना की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और आधुनिक युद्धक कौशल को प्रदर्शित किया।

जनरल द्विवेदी ने भारतीय सेना के व्यापक आधुनिकीकरण और परिवर्तन की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। उनके नेतृत्व में सेना ने नई तकनीकों को अपनाने, बल पुनर्गठन और युद्धक क्षमताओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया। रुद्र ब्रिगेड, भैरव बटालियन, अश्नी ड्रोन प्लाटून, शक्तिबाण रेजिमेंट, दिव्यास्त्र बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध ब्रिगेड और एकीकृत युद्ध समूह जैसी आधुनिक पहलें इसी दृष्टिकोण का हिस्सा रहीं। इन प्रयासों का उद्देश्य भारतीय सेना को भविष्य की चुनौतियों के लिए अधिक सक्षम, चुस्त और तकनीक-संपन्न बनाना था।

तीनों सेनाओं—थल सेना, नौसेना और वायु सेना—के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने संयुक्त सैन्य अभियानों और एकीकृत युद्ध रणनीति की आवश्यकता पर लगातार बल दिया, जिससे भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सशस्त्र बलों की सामूहिक क्षमता मजबूत हो सके।

सैनिकों और पूर्व सैनिकों के कल्याण को भी उन्होंने अपनी प्राथमिकताओं में शामिल रखा। उनके कार्यकाल में सैनिकों, वीर नारियों और पूर्व सैनिकों के लिए कई कल्याणकारी पहल शुरू की गईं। “वेटरन्स अचीवर्स अवार्ड” जैसी योजनाओं के माध्यम से पूर्व सैनिकों के योगदान को सम्मानित किया गया और यह संदेश दिया गया कि सेना अपने जवानों और उनके परिवारों के साथ सेवा के बाद भी मजबूती से खड़ी है।

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने “विकसित भारत विजन 2047” और “सशस्त्र बल विजन 2047” के अनुरूप सेना की दीर्घकालिक रणनीति तैयार करने में भी अहम योगदान दिया। उनके मार्गदर्शन में तैयार सामरिक सुरक्षा दिशानिर्देश 2047 भविष्य की सुरक्षा आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं।

अपने उत्कृष्ट नेतृत्व, समर्पण और राष्ट्रसेवा के लिए जनरल उपेंद्र द्विवेदी को परम विशिष्ट सेवा पदक (PVSM) और अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) सहित कई प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुए हैं। उनकी सेवानिवृत्ति भारतीय सेना के एक महत्वपूर्ण अध्याय का समापन है, जबकि उनके योगदान आने वाले वर्षों तक सेना को प्रेरित करते रहेंगे।