Vibrant Gujarat 2026: रक्षा उत्पादन और तकनीक पर राजनाथ सिंह का जोर

Tue 30-Jun-2026,11:32 PM IST +05:30

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Vibrant Gujarat 2026: रक्षा उत्पादन और तकनीक पर राजनाथ सिंह का जोर Vibrant Gujarat 2026
  • राजनाथ सिंह ने विकसित भारत के लिए आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र को महत्वपूर्ण बताया।

  • रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये और निर्यात 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंचा।

  • गुजरात को रक्षा, सेमीकंडक्टर और तकनीकी नवाचार का बड़ा केंद्र बताया गया।

Gujarat / Vadodara :

Vadodara / रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वडोदरा में आयोजित वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन में कहा कि “विकसित भारत” केवल आर्थिक प्रगति का लक्ष्य नहीं है, बल्कि एक ऐसा राष्ट्र बनाने का संकल्प है जो आर्थिक रूप से मजबूत, तकनीकी रूप से सक्षम और सामाजिक रूप से सशक्त हो। उन्होंने उद्योग जगत, उद्यमियों, स्टार्टअप्स और शिक्षाविदों से आह्वान किया कि वे भारत को वैश्विक शक्ति बनाने की इस यात्रा में सक्रिय भागीदारी निभाएं।

राजनाथ सिंह ने कहा कि किसी भी महान राष्ट्र की मजबूती तीन प्रमुख स्तंभों पर टिकी होती है—आर्थिक शक्ति, तकनीकी उत्कृष्टता और राष्ट्रीय सुरक्षा। उनका मानना है कि मजबूत अर्थव्यवस्था और उन्नत तकनीक राष्ट्रीय सुरक्षा को सशक्त बनाती हैं, जबकि सुरक्षित वातावरण उद्योगों और नवाचार को आगे बढ़ाने में मदद करता है। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की आत्मनिर्भरता, तकनीकी क्षमता और सामूहिक संकल्प ही आने वाले वर्षों में उसकी वैश्विक भूमिका तय करेंगे।

रक्षा मंत्री ने बताया कि पिछले एक दशक में भारत के रक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव आया है। एक समय देश अपनी रक्षा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर था, लेकिन आज भारत रक्षा उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में तेजी से उभरती हुई शक्ति बन गया है। उन्होंने कहा कि “मेक इन इंडिया”, “आत्मनिर्भर भारत”, तकनीकी विकास कोष, आईडीईएक्स और रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया में सुधार जैसे कदमों ने इस परिवर्तन को गति दी है।

उन्होंने आंकड़ों का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2014 में जहां घरेलू रक्षा उत्पादन लगभग 46,000 करोड़ रुपये था, वहीं अब यह बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसी तरह रक्षा निर्यात भी 1,000 करोड़ रुपये से कम के स्तर से बढ़कर रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि सरकार, उद्योग और नवाचार क्षेत्र के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।

राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भरता का अर्थ दुनिया से अलग होना नहीं है। इसका मतलब है कि भारत अपनी क्षमता के बल पर मजबूत बने और वैश्विक स्तर पर समान भागीदार के रूप में आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि सरकार विदेशी कंपनियों के साथ तकनीकी सहयोग, संयुक्त उद्यम और तकनीक हस्तांतरण को प्रोत्साहित कर रही है ताकि उसका लाभ भारत की धरती पर उद्योगों और युवाओं को मिल सके।

गुजरात की भूमिका पर विशेष जोर देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य के पास मजबूत औद्योगिक आधार, कुशल मानव संसाधन और उद्यमशीलता की संस्कृति है। उन्होंने वडोदरा स्थित टाटा-एयरबस संयंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां सी-295 परिवहन विमान बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा के-9 वज्र जैसी अत्याधुनिक तोप प्रणाली का निर्माण भी गुजरात में हो रहा है, जो भारतीय सेना की ताकत बढ़ा रही है।

उन्होंने सेमीकंडक्टर उद्योग को भविष्य की तकनीकी शक्ति का आधार बताते हुए कहा कि साणंद और धोलेरा में विकसित हो रहा सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम भारत की तकनीकी संप्रभुता को नई ऊंचाई देगा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में गुजरात की क्षमता भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत बनाएगी।

कार्यक्रम के अंत में राजनाथ सिंह ने विश्वास जताया कि उद्योग, नवाचार और आत्मनिर्भरता के समन्वय से भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को हासिल कर सकेगा। उन्होंने कहा कि गुजरात इस राष्ट्रीय अभियान में अग्रणी भूमिका निभाने की पूरी क्षमता रखता है और देश के विकास को नई दिशा दे सकता है।