विश्व पुस्तक मेला-2026 में साहित्य अकादमी के फेस-टू-फेस और कहानी पठन कार्यक्रम

Fri 16-Jan-2026,11:11 PM IST +05:30

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विश्व पुस्तक मेला-2026 में साहित्य अकादमी के फेस-टू-फेस और कहानी पठन कार्यक्रम Sahitya-Akademi-Engages-Readers-with-Face-to-Face-Sessions-at-World-Book-Fair-2026--Hindi_
  • नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला-2026 में साहित्य अकादमी के फेस-टू-फेस कार्यक्रमों ने लेखकों और पाठकों के बीच सीधा संवाद स्थापित किया।

  • कहानी पठन सत्रों में भारतीय भाषाओं की विविध कहानियों ने सामाजिक यथार्थ और मानवीय संवेदनाओं को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया।

  • साहित्य अकादमी का उद्देश्य नई पीढ़ी को साहित्य, पठन संस्कृति और रचनात्मक अभिव्यक्ति से जोड़ना रहा।

Delhi / New Delhi :

Delhi /  नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला-2026 के दौरान साहित्य अकादमी ने साहित्य प्रेमियों और लेखकों के लिए एक सशक्त संवाद मंच प्रदान करते हुए फेस-टू-फेस संवाद और कहानी पठन कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया। भारत मंडपम, प्रगति मैदान में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के पुस्तक मेले में साहित्य अकादमी के ये कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केंद्र बने रहे।

फेस-टू-फेस कार्यक्रम के अंतर्गत देश के विभिन्न भाषाओं के प्रतिष्ठित लेखक, कवि और साहित्यकार पाठकों के साथ सीधे संवाद में शामिल हुए। इन सत्रों में लेखन प्रक्रिया, समकालीन साहित्य, सामाजिक सरोकारों और भाषाई विविधता जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई। पाठकों को अपने पसंदीदा लेखकों से सवाल पूछने और उनके अनुभवों को जानने का दुर्लभ अवसर मिला, जिससे साहित्य और समाज के बीच संवाद और मजबूत हुआ।

वहीं कहानी पठन कार्यक्रमों ने श्रोताओं को साहित्य की भावनात्मक दुनिया से जोड़ा। युवा और वरिष्ठ लेखकों ने अपनी-अपनी भाषाओं में कहानियों का पाठ किया, जिनमें सामाजिक यथार्थ, मानवीय संवेदनाएं, लोक जीवन और आधुनिक चुनौतियों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। इन सत्रों में विद्यार्थियों, शोधार्थियों और आम पाठकों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली।

साहित्य अकादमी के अधिकारियों के अनुसार, इन कार्यक्रमों का उद्देश्य भारतीय भाषाओं के साहित्य को बढ़ावा देना और नई पीढ़ी को पठन-पाठन तथा रचनात्मक लेखन से जोड़ना है। विश्व पुस्तक मेला जैसे मंच पर ऐसे आयोजन साहित्य को केवल पुस्तकों तक सीमित न रखकर जीवंत संवाद का रूप देते हैं।

नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला-2026 में साहित्य अकादमी की सक्रिय भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि साहित्य केवल पढ़ने की वस्तु नहीं, बल्कि विचारों के आदान-प्रदान और सांस्कृतिक समृद्धि का माध्यम भी है। आने वाले दिनों में भी ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से साहित्य अकादमी देश की साहित्यिक विरासत को नई दिशा देने की प्रतिबद्धता दोहराती नजर आई।