बीएमसी चुनाव 2026: मुंबई में भाजपा की ऐतिहासिक बढ़त, ठाकरे परिवार का 25 साल पुराना वर्चस्व डगमगाया

Fri 16-Jan-2026,05:57 PM IST +05:30

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बीएमसी चुनाव 2026: मुंबई में भाजपा की ऐतिहासिक बढ़त, ठाकरे परिवार का 25 साल पुराना वर्चस्व डगमगाया BMC Chunav 2026
  • SIR के तहत दावे और आपत्तियों की अंतिम तारीख 19 जनवरी 2026.

  • पांच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिला अतिरिक्त समय.

  • मतदाता सूची को अपडेट और त्रुटिरहित बनाने पर जोर.

Maharashtra / Mumbai :

Mumbai / मुंबई की सियासत में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव 2026 के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी ने लगातार बढ़त बनाए रखते हुए सत्ता की ओर निर्णायक कदम बढ़ा दिया है। शुरुआती रुझानों से साफ है कि मुंबई की जनता ने पहली बार भाजपा को खुलकर समर्थन दिया है और फडणवीस–शिंदे की जोड़ी पर भरोसा जताया है। यह चुनाव ठाकरे परिवार के लिए अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक झटका साबित होता नजर आ रहा है, क्योंकि बीएमसी पर उनका लगभग 25 वर्षों से चला आ रहा वर्चस्व टूटता दिख रहा है।

227 वार्डों वाली बीएमसी में बहुमत के लिए 114 सीटों की जरूरत होती है। दोपहर 2 बजकर 21 मिनट तक के रुझानों के अनुसार भाजपा 92 वार्डों में आगे चल रही है, जबकि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) 60 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। वहीं मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना 26 वार्डों में आगे है। अन्य दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों की स्थिति सीमित नजर आ रही है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर रही है और महायुति गठबंधन बहुमत के करीब पहुंच चुका है।

बीएमसी को देश की सबसे अमीर नगरपालिकाओं में गिना जाता है और इसका बजट कई राज्यों के बजट से भी अधिक होता है। ऐसे में इस निकाय पर नियंत्रण मुंबई ही नहीं, बल्कि पूरे महाराष्ट्र की राजनीति में बेहद अहम माना जाता है। अब तक शिवसेना और ठाकरे परिवार की पहचान बीएमसी से जुड़ी रही है। बाल ठाकरे के दौर से लेकर उद्धव ठाकरे तक, मुंबई महानगरपालिका शिवसेना की ताकत का सबसे बड़ा केंद्र रही है। लेकिन इस बार के नतीजे बताते हैं कि मुंबई की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश कर रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा की इस बढ़त के पीछे कई कारण हैं। एक ओर राज्य सरकार में स्थिरता, विकास और प्रशासनिक फैसलों को लेकर जनता का समर्थन माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष का बिखराव भी बड़ा कारण रहा। शिवसेना के दो गुटों में बंटने का असर सीधे बीएमसी चुनाव पर पड़ा है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) ने भले ही कड़ी टक्कर दी हो, लेकिन वह भाजपा की बढ़त को रोकने में सफल नहीं हो पाई।

भाजपा ने इस चुनाव में स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। सड़क, पानी, सफाई, झुग्गी पुनर्विकास और पारदर्शी प्रशासन जैसे सवालों को लेकर पार्टी ने आक्रामक अभियान चलाया। साथ ही मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की जोड़ी ने चुनाव प्रचार में सरकार की उपलब्धियों को प्रमुखता से सामने रखा। इसका सीधा असर मतदाताओं के रुझान में दिखाई दे रहा है।

दूसरी ओर, ठाकरे गुट के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल था। पार्टी ने मराठी अस्मिता और मुंबई की पारंपरिक राजनीति को मुद्दा बनाया, लेकिन बदले हुए राजनीतिक हालात में यह रणनीति अपेक्षित असर नहीं दिखा पाई। यदि अंतिम नतीजे भी मौजूदा रुझानों के अनुरूप आते हैं, तो यह ठाकरे परिवार के राजनीतिक इतिहास का सबसे बड़ा झटका माना जाएगा।

बीएमसी चुनाव के नतीजों का असर केवल नगर निगम तक सीमित नहीं रहेगा। यह परिणाम आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। भाजपा की मजबूती और महायुति गठबंधन की संभावित सत्ता यह संकेत दे रही है कि मुंबई की जनता बदलाव चाहती है और उसने नेतृत्व के नए विकल्प को मौका दिया है।

हालांकि अभी अंतिम परिणाम घोषित होना बाकी है, लेकिन मौजूदा रुझान साफ तौर पर यह कहानी बयां कर रहे हैं कि मुंबई की सत्ता की चाबी अब नए हाथों में जाती दिख रही है। बीएमसी चुनाव 2026 को एक ऐसे मोड़ के रूप में याद किया जाएगा, जहां मुंबई की राजनीति में दशकों पुराना संतुलन टूटता नजर आया।