कवर्धा अस्पताल में डायलिसिस के दौरान युवती की मौत
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कवर्धा जिला अस्पताल में डायलिसिस के दौरान युवती की मौत, परिजनों ने इलाज में गंभीर लापरवाही और ऑक्सीजन सपोर्ट नहीं मिलने का आरोप लगाया।
मामला सरकारी अस्पतालों में डायलिसिस व्यवस्था, मरीज सुरक्षा और आपात चिकित्सा सुविधाओं की खामियों को उजागर करता है।
Kawardha/ छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिला अस्पताल से एक गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जिसने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। डायलिसिस के दौरान 19 वर्षीय युवती की मौत के बाद अस्पताल परिसर में तनावपूर्ण हालात बन गए। परिजनों ने डॉक्टरों और स्टाफ पर इलाज में भारी चूक का आरोप लगाया है। इस घटना ने मरीजों की सुरक्षा, डायलिसिस प्रबंधन और आपात चिकित्सा सेवाओं की वास्तविक स्थिति को उजागर कर दिया है।
डायलिसिस के दौरान बिगड़ी हालत
मृतका भगवती धुर्वे (19), निवासी चरखुरा, को नियमित डायलिसिस के लिए कवर्धा जिला अस्पताल लाया गया था। परिजनों के अनुसार, डायलिसिस प्रक्रिया के दौरान अचानक युवती की तबीयत बिगड़ने लगी। आरोप है कि निर्धारित समय से पहले ही डायलिसिस रोक दी गई और मरीज को मशीन से हटा दिया गया, जिससे उसकी स्थिति और गंभीर हो गई।
ऑक्सीजन नहीं मिलने का आरोप
परिजनों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हालत बिगड़ने के बावजूद युवती को तत्काल ऑक्सीजन सपोर्ट नहीं दिया गया। ऑक्सीजन की कमी के कारण सांस लेने में परेशानी बढ़ती चली गई। परिजनों का दावा है कि उन्होंने बार-बार स्टाफ से मदद की गुहार लगाई, लेकिन समय रहते जरूरी उपचार उपलब्ध नहीं कराया गया।
अस्पताल में हंगामा और नाराज़गी
घटना के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और जिम्मेदार डॉक्टरों पर कार्रवाई की मांग की। कुछ समय के लिए अस्पताल में तनाव की स्थिति बनी रही, जिसे प्रशासन ने संभालने का प्रयास किया।
जांच की मांग और प्रशासन की भूमिका
परिजनों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय पर ऑक्सीजन और सही इलाज मिलता, तो भगवती की जान बचाई जा सकती थी। फिलहाल अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। मामले ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।