छत्तीसगढ़ में सभी विवाहों का पंजीयन अनिवार्य
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Chhattisgarh-Marriage-Registration-Mandatory-2016
अनिवार्य विवाह पंजीकरण से बाल विवाह, फर्जी विवाह और वैवाहिक धोखाधड़ी जैसे मामलों पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।
विवाह प्रमाणपत्र से महिलाओं को कानूनी अधिकार, संपत्ति विवाद समाधान और सरकारी योजनाओं में सीधा लाभ मिलेगा।
Raipur/ राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार, राज्य सरकार ने ‘छत्तीसगढ़ आनंद विवाह पंजीयन नियम, 2016’ के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए विवाह पंजीकरण को कानूनी रूप से अनिवार्य घोषित किया है। इससे पहले कई मामलों में विवाह का पंजीकरण स्वैच्छिक था, जिससे कानूनी विवादों में जटिलताएं सामने आती थीं।
सरकार ने पंजीकरण की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए उन्हीं अधिकारियों को अधिकृत किया है, जो पहले से ‘छत्तीसगढ़ विवाह का अनिवार्य पंजीयन नियम, 2006’ के अंतर्गत कार्यरत हैं। इससे आम नागरिकों को अतिरिक्त कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
सरकार का उद्देश्य बाल विवाह, फर्जी विवाह और वैवाहिक धोखाधड़ी जैसे मामलों पर प्रभावी रोक लगाना है। विवाह का आधिकारिक रिकॉर्ड होने से महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित होगी।
इस निर्णय से महिलाओं को सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना है। विवाह प्रमाणपत्र संपत्ति विवाद, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और वैवाहिक विवादों में एक मजबूत कानूनी आधार प्रदान करेगा।
इसके अलावा विवाह पंजीयन प्रमाणपत्र का उपयोग पासपोर्ट, बैंकिंग, बीमा और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी किया जा सकेगा। अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि तय समय-सीमा के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।