Haryana Bonded Labour Case: NHRC ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश
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Bonded Labour Cases in Haryana
NHRC ने हरियाणा में बंधुआ मजदूरी के 86 मामलों की समीक्षा की।
अधिकारियों को SOP के अनुसार जांच और कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
आयोग ने बंधुआ मजदूरों की सहायता के लिए हेल्पलाइन शुरू करने पर जोर दिया।
Faridabad / राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने हरियाणा के विभिन्न जिलों में ईंट भट्टों से जुड़े कथित बंधुआ मजदूरी के 86 मामलों की सुनवाई करते हुए राज्य प्रशासन को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि बंधुआ मजदूरी जैसे गंभीर मामलों में जांच प्रक्रिया पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ की जानी चाहिए, ताकि पीड़ित श्रमिकों को समय पर न्याय और सहायता मिल सके।
ऑनलाइन आयोजित इस सुनवाई की अध्यक्षता एनएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन ने की। सुनवाई में आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, श्रम आयुक्त विजयकुमार भाविकट्टी और विभिन्न जिलों के जिला मजिस्ट्रेट भी शामिल हुए। आयोग ने इन मामलों से संबंधित प्रशासनिक कार्रवाई और जांच रिपोर्टों की विस्तृत समीक्षा की।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति रामासुब्रमणियन ने चिंता जताई कि कई मामलों में संबंधित अधिकारियों ने उपलब्ध अभिलेखों और तथ्यों की पर्याप्त जांच नहीं की। उन्होंने कहा कि कई मामलों में बंधुआ मजदूरी साबित करने के लिए आवश्यक और विश्वसनीय साक्ष्य उपलब्ध नहीं थे। ऐसे में अधिकारियों को जांच के दौरान अधिक सतर्कता और गंभीरता बरतने की आवश्यकता है।
एनएचआरसी अध्यक्ष ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि बंधुआ मजदूरी से जुड़े मामलों की जांच करते समय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा 14 मई 2026 को जारी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का पूरी तरह पालन किया जाए। इस एसओपी में बंधुआ मजदूरों की पहचान, उनके बचाव, पुनर्वास और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित की गई है।
सुनवाई के दौरान आयोग ने बंधुआ मजदूरी की घटनाओं की निगरानी के लिए एक समर्पित हेल्पलाइन शुरू करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। आयोग का मानना है कि ऐसी हेल्पलाइन से श्रमिकों को संकट की स्थिति में तुरंत सहायता मिल सकेगी और बंधुआ मजदूरी के मामलों की समय पर जानकारी प्रशासन तक पहुंच सकेगी।
एनएचआरसी के संयुक्त सचिव समीर कुमार ने भी अधिकारियों को आयोग की सलाह और दिशा-निर्देशों का पालन करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने विशेष रूप से 'बंधुआ मजदूरों की पहचान, रिहाई और पुनर्वास हेतु जारी सलाह 2.0' के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने पर बल दिया।
सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार की ओर से मुख्य सचिव, श्रम आयुक्त और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने अपनी रिपोर्टें प्रस्तुत कीं। आयोग ने इन रिपोर्टों का अवलोकन किया और कई मामलों में अतिरिक्त जानकारी मांगी। राज्य सरकार ने आयोग को आश्वस्त किया कि सभी 86 मामलों की दोबारा समीक्षा की जाएगी और आवश्यक तथ्य एवं रिपोर्ट जल्द प्रस्तुत की जाएंगी।
हरियाणा सरकार ने यह भी भरोसा दिलाया कि बंधुआ मजदूरी से जुड़े मामलों में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और संबंधित कानूनों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। साथ ही जरूरत पड़ने पर तत्काल राहत और पुनर्वास संबंधी कदम भी उठाए जाएंगे।
यह सुनवाई बंधुआ मजदूरी जैसी गंभीर सामाजिक समस्या के प्रति प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आयोग ने स्पष्ट संकेत दिया है कि मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और जरूरत पड़ने पर आगे भी कड़ी निगरानी जारी रखी जाएगी।