Sonam Wangchuk Hunger Strike: अन्ना हजारे ने सरकार से बातचीत शुरू करने की अपील की
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Sonam Wangchuk Hunger Strike
सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया।
अन्ना हजारे ने सरकार से आंदोलनकारियों के साथ बातचीत करने की अपील की।
आंदोलनकारियों ने एनटीए जांच, परीक्षा सुधार और जवाबदेही की मांग उठाई।
नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के लंबे अनशन को लेकर केंद्र सरकार से बातचीत शुरू करने की अपील की है। दिल्ली पुलिस द्वारा वांगचुक को जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले जाए जाने के बाद अन्ना हजारे ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद सबसे प्रभावी रास्ता होता है और सरकार को इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए।
अन्ना हजारे ने कहा कि सोनम वांगचुक करीब 20 दिनों तक अनशन पर रहे हैं और अब उनके धैर्य की परीक्षा लेना उचित नहीं है। उनका कहना था कि सरकार उनकी सभी मांगें माने या न माने, लेकिन बातचीत जरूर करे। यदि सरकार किसी मांग से सहमत नहीं है तो उसे स्पष्ट रूप से अपनी बात रखनी चाहिए, वहीं आंदोलनकारियों की बात भी गंभीरता से सुननी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद का स्थायी समाधान केवल संवाद और आपसी समझ से ही निकल सकता है।
दरअसल, सोनम वांगचुक अपनी विभिन्न मांगों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे थे। शनिवार को उनका अनशन 21वें दिन में प्रवेश कर गया। लंबे समय तक भोजन नहीं लेने के कारण उनकी तबीयत बिगड़ने लगी, जिसके बाद दिल्ली पुलिस उन्हें इलाज के लिए सफदरजंग अस्पताल ले गई।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, लगातार ठोस भोजन न लेने की वजह से उनके शरीर में काफी कमजोरी आ गई है। डॉक्टरों ने उनके शरीर में पानी की कमी के संकेत भी पाए हैं। हालांकि अस्पताल पहुंचने के समय वह पूरी तरह होश में थे और उनका ब्लड प्रेशर, नाड़ी तथा ऑक्सीजन स्तर सामान्य था। फिलहाल डॉक्टरों की एक टीम उनकी सेहत पर लगातार निगरानी रख रही है और उन्हें आवश्यक चिकित्सा उपचार लेने के लिए समझाने का प्रयास कर रही है।
सोनम वांगचुक और उनके आंदोलन का समर्थन कर रहे संगठनों की प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की रही है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि NEET समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं ने लाखों छात्रों का विश्वास कमजोर किया है। उनका कहना है कि इन मामलों में राजनीतिक जवाबदेही तय होनी चाहिए।
इसके अलावा आंदोलनकारियों ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच, पेपर लीक मामलों की पारदर्शी जांच और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग भी उठाई है। उनका मानना है कि पारदर्शी और भरोसेमंद परीक्षा व्यवस्था छात्रों के भविष्य के लिए बेहद जरूरी है।
फिलहाल सभी की नजर सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी है। अन्ना हजारे की अपील के बाद यह उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत का रास्ता खुल सकता है, जिससे इस विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकल सके।