ICAR ने जारी की 184 उन्नत फसल किस्में, कृषि में नई क्रांति का आगाज़
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पीएम मोदी के नेतृत्व में पिछले 11-12 वर्षों में बीज विकास की रफ्तार दोगुनी हुई, 3236 नई प्रजातियों को मिली मंजूरी।
सूखा, बाढ़ और रोग-कीट प्रतिरोधी किस्में ‘लैब से लैंड’ मॉडल के जरिए कृषि में नई क्रांति को मजबूती देंगी।
नई दिल्ली/ केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली स्थित एनएएससी कॉम्प्लेक्स के ए.पी. शिंदे ऑडिटोरियम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा विकसित 25 फील्ड फसलों की 184 उन्नत किस्मों का औपचारिक अनावरण किया। यह कार्यक्रम आईसीएआर के तत्वावधान में आयोजित हुआ, जिसमें देशभर के वैज्ञानिक, वरिष्ठ अधिकारी, कृषि विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि और निजी बीज क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल हुए।
इस अवसर पर श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत ने उच्च उत्पादक और जलवायु-सहनशील बीजों के विकास में ऐतिहासिक प्रगति की है। उन्होंने बताया कि 1969 में शुरू हुई गजट अधिसूचना प्रक्रिया के बाद अब तक कुल 7205 फसल प्रजातियों को अधिसूचित किया जा चुका है। इनमें धान, गेहूं, मक्का, ज्वार, दलहन, तिलहन, रेशेदार और अन्य प्रमुख फसलें शामिल हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते 11–12 वर्षों में इस प्रक्रिया ने अभूतपूर्व गति पकड़ी है। इस अवधि में 3236 नई उच्च उत्पादक किस्मों को मंजूरी दी गई, जबकि 1969 से 2014 तक 3969 किस्में अधिसूचित हुई थीं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज जारी की गई 184 उन्नत किस्में किसानों को अधिक उपज, बेहतर गुणवत्ता, पोषण-संपन्नता और जलवायु अनुकूलता जैसे अनेक लाभ देंगी। ये किस्में सूखा, बाढ़, लवणीय-क्षारीय मिट्टी और रोग-कीट प्रतिरोध जैसी विशेषताओं से युक्त हैं, जो बदलते मौसम के दौर में किसानों के लिए सुरक्षा कवच बनेंगी।
उन्होंने बताया कि इन किस्मों का विकास आईसीएआर की अखिल भारतीय समन्वित फसल परियोजनाओं के तहत परिषद की संस्थाओं, राज्य व केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालयों तथा निजी बीज कंपनियों के संयुक्त प्रयास से हुआ है। कुल 184 किस्मों में परिषद की संस्थाओं ने 60, विश्वविद्यालयों ने 62 और निजी क्षेत्र की बीज कंपनियों ने 62 किस्मों का योगदान दिया है। यह ‘लैब से लैंड’ तक तकनीक पहुंचाने का सफल उदाहरण है।
कार्यक्रम में जारी की गई किस्मों में 122 अनाज फसलें शामिल हैं, जिनमें धान की 60 और मक्का की 50 नई किस्में प्रमुख हैं। इसके साथ ही ज्वार, बाजरा, रागी, लघु मिलेट्स और प्रोसो मिलेट की उन्नत किस्में पोषण सुरक्षा को मजबूती देंगी। दलहनों की 6 नई किस्में प्रोटीन सुरक्षा और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देंगी, जबकि तिलहनों की 13 नई किस्में तेल उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में सहायक होंगी। गन्ने की 6, कपास की 24 (जिसमें 22 बीटी कपास) और 11 चारा फसलों की किस्में भी जारी की गईं।
श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बीज किसी भी कृषि उत्पादन प्रणाली की आत्मा है। सरकार का लक्ष्य है कि अगले तीन वर्षों में ये उन्नत बीज देशभर के किसानों तक पहुंचें। उन्होंने बताया कि भारत ने चावल उत्पादन में 150.18 मिलियन टन के साथ नया रिकॉर्ड बनाते हुए चीन को पीछे छोड़ दिया है। यह उपलब्धि किसानों, वैज्ञानिकों, शोध संस्थानों और निजी क्षेत्र के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। कार्यक्रम में एनएससी द्वारा 33.26 करोड़ रुपये का लाभांश चेक भी केंद्रीय मंत्री को सौंपा गया।