बजट सत्र से पहले 3 मंत्रियों को हटाने की मांग

Thu 12-Feb-2026,01:08 PM IST +05:30

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बजट सत्र से पहले 3 मंत्रियों को हटाने की मांग MP-Politics-Jitu-Patwari-Letter-Ministers-Removal
  • बजट सत्र से पहले जीतू पटवारी ने तीन मंत्रियों को हटाने की मांग कर सरकार की नैतिक जवाबदेही पर सवाल उठाए।

  • कर्नल प्रकरण, भागीरथपुरा घटना और कफ सिरप मामले को लेकर मंत्री विजय शाह, विजयवर्गीय और शुक्ल पर निशाना।

Madhya Pradesh / Bhopal :

Bhopal/ मध्यप्रदेश की राजनीति में बजट सत्र से पहले हलचल तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर मंत्रिमंडल के तीन सदस्यों को हटाने की मांग की है। पटवारी ने आरोप लगाया कि सरकार संवैधानिक मर्यादाओं और नैतिक जवाबदेही के मुद्दों को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने कहा कि जनभावनाओं से जुड़े गंभीर मामलों पर ठोस कार्रवाई आवश्यक है।

पत्र में जीतू पटवारी ने मंत्री विजय शाह, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और स्वास्थ्य मंत्री व डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग की है। उन्होंने मंत्री विजय शाह का नाम कर्नल सोफिया से जुड़े विवादित मामले के संदर्भ में लिया। वहीं, कैलाश विजयवर्गीय पर भागीरथपुरा की घटना और क्षेत्रीय प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल को लेकर पटवारी ने छिंदवाड़ा में कथित रूप से कफ सिरप से बच्चों की मौत के मामले का उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे गंभीर प्रकरणों के बावजूद संबंधित मंत्री अपने पद पर बने हुए हैं, जो सरकार की नैतिक जिम्मेदारी पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि 16 फरवरी से राज्य का बजट सत्र प्रारंभ होने जा रहा है, जिसमें राज्यपाल का अभिभाषण प्रस्तावित है। पटवारी का कहना है कि सरकार प्रदेश की वास्तविक आर्थिक स्थिति और बढ़ते कर्ज के मुद्दे पर भी स्पष्टता नहीं दे रही है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने लिखा कि मध्यप्रदेश एक लोकतांत्रिक राज्य है और यहां शासन की प्रत्येक इकाई से संवैधानिक मूल्यों के पालन की अपेक्षा की जाती है। सेना के सम्मान, मासूम बच्चों की मौत और प्रशासनिक लापरवाही जैसे मामलों में जवाबदेही तय करना आवश्यक है।

उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि बजट सत्र के दौरान राज्यपाल के अभिभाषण से पहले इन मंत्रियों को पद से हटाया जाए, ताकि जनभावनाओं का सम्मान हो सके। फिलहाल इस पत्र पर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।