जबलपुर में दो स्कूली छात्राओं की आत्महत्या
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बिना सुसाइड नोट के हुई घटना, पुलिस पारिवारिक, शैक्षणिक और मानसिक दबाव के सभी पहलुओं की जांच में जुटी।
विशेषज्ञों ने बच्चों से संवाद बढ़ाने और समय पर काउंसलिंग की जरूरत पर जोर दिया।
MP NEWS/ जबलपुर जिले में दो स्कूली छात्राओं की आत्महत्या की घटना ने शिक्षा व्यवस्था, अभिभावकों और समाज को गंभीर सोच में डाल दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, दोनों छात्राएं एक ही स्कूल में पढ़ती थीं और अलग-अलग कक्षाओं—9वीं और 10वीं—की छात्रा थीं। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में किसी प्रकार का सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है, जिससे आत्महत्या के पीछे के कारणों का अभी तक खुलासा नहीं हो सका है। परिजनों और स्कूल प्रबंधन से भी पूछताछ की जा रही है ताकि यह समझा जा सके कि छात्राएं किसी मानसिक दबाव, पारिवारिक परेशानी या शैक्षणिक तनाव से गुजर रही थीं या नहीं।
घटना के बाद से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं स्कूल और स्थानीय लोगों में भी गहरा दुख और चिंता देखी जा रही है। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि किशोर अवस्था में बच्चों पर पढ़ाई, परीक्षा, सामाजिक अपेक्षाओं और भावनात्मक बदलावों का गहरा असर पड़ता है, जिसे समय रहते समझना बेहद जरूरी है।
पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट व कॉल डिटेल्स जैसी तकनीकी जानकारियों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने अभिभावकों और शिक्षकों से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की अपील की है।