MP UCC Bill 2026: मध्य प्रदेश कैबिनेट ने Uniform Civil Code Draft को दी मंजूरी

Sun 19-Jul-2026,10:39 PM IST +05:30

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MP UCC Bill 2026: मध्य प्रदेश कैबिनेट ने Uniform Civil Code Draft को दी मंजूरी Madhya Pradesh UCC
  • मध्य प्रदेश कैबिनेट ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल 2026 के ड्राफ्ट को मंजूरी दी।

  • UCC विधेयक 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा।

  • ड्राफ्ट में विवाह पंजीकरण अनिवार्य, जबकि अनुसूचित जनजातियों को UCC के दायरे से बाहर रखा गया है।

Madhya Pradesh / Bhopal :

Bhopal / मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) विधेयक, 2026 के मसौदे को कैबिनेट की मंजूरी देकर बड़ा कदम उठाया है। अब इस विधेयक को 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कैबिनेट बैठक के बाद इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि मंत्रिपरिषद ने पूरे उत्साह और सर्वसम्मति से ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विधेयक समानता और न्याय की भावना को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार, भारतीय संस्कृति और संविधान की मूल भावना में समानता का विशेष महत्व है और सरकार उसी दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि यह मसौदा व्यापक जनसुझावों के आधार पर तैयार किया गया है तथा समाज के अधिकांश वर्गों ने इसका समर्थन किया है।

सरकार के अनुसार, प्रस्तावित यूसीसी अनुसूचित जनजातियों (आदिवासी समुदायों) को छोड़कर राज्य के अन्य सभी नागरिकों पर लागू होगा। ड्राफ्ट में विवाह का अनिवार्य पंजीकरण करने का प्रावधान रखा गया है। साथ ही पुरुषों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष निर्धारित की गई है।

मध्य प्रदेश सरकार ने यूसीसी का मसौदा तैयार करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई ने की। समिति ने हाल ही में अपनी विस्तृत रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया कि राज्य के अनुसूचित जनजाति समुदायों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा जाए।

समिति को विवाह, तलाक, गुजारा-भत्ता, उत्तराधिकार, गोद लेने और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे व्यक्तिगत एवं पारिवारिक कानूनों का अध्ययन कर मध्य प्रदेश की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप सुझाव देने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसी आधार पर विधेयक का मसौदा तैयार किया गया है।

सरकार का कहना है कि ड्राफ्ट तैयार करते समय महिला-पुरुष समानता, संवैधानिक मूल्यों और सार्वजनिक नीति को प्राथमिकता दी गई है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया है कि विभिन्न समुदायों की परंपराओं और सांस्कृतिक रीति-रिवाजों का सम्मान बना रहे और सामाजिक संतुलन प्रभावित न हो।

अब इस विधेयक को विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। यदि सदन से इसे मंजूरी मिलती है, तो मध्य प्रदेश उन राज्यों की सूची में शामिल हो जाएगा, जिन्होंने समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। यह विधेयक आगामी सत्र में राजनीतिक और सामाजिक बहस का प्रमुख विषय बनने की संभावना है।