Sonam Wangchuk Case: Safdarjung Hospital से Private Hospital Shift पर कानूनी लड़ाई तेज

Sun 19-Jul-2026,10:33 PM IST +05:30

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Sonam Wangchuk Case: Safdarjung Hospital से Private Hospital Shift पर कानूनी लड़ाई तेज Sonam Wangchuk News
  • सोनम वांगचुक की पत्नी दिल्ली हाईकोर्ट के सिंगल जज के फैसले को चुनौती देंगी।

  • निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग पर फिलहाल राहत नहीं, इलाज सफदरजंग अस्पताल में जारी।

  • हाईकोर्ट ने सरकार, दिल्ली पुलिस और अस्पताल प्रशासन से तीन दिन में स्टेटस रिपोर्ट मांगी।

Delhi / Delhi :

Delhi / पर्यावरण कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक के इलाज को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में नया मोड़ आ गया है। उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो अब दिल्ली हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश (सिंगल जज) के उस फैसले को चुनौती देंगी, जिसमें वांगचुक को फिलहाल निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने से राहत देने से इनकार कर दिया गया था। मामले का उल्लेख सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष किए जाने की संभावना है।

इससे पहले हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि सोनम वांगचुक की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए सरकार द्वारा उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराना उचित और आवश्यक कदम था। अदालत ने स्पष्ट किया कि इलाज से जुड़े सभी निर्णय केवल मेडिकल विशेषज्ञों की सलाह, चिकित्सकीय आवश्यकता और मरीज की सहमति के आधार पर लिए जाएंगे। फिलहाल उनका उपचार सफदरजंग अस्पताल में जारी रहेगा और उनकी निगरानी सफदरजंग अस्पताल तथा एम्स के विशेषज्ञ डॉक्टरों की संयुक्त टीम कर रही है।

सुनवाई के दौरान सोनम वांगचुक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत से आग्रह किया कि उन्हें अपनी पसंद के किसी निजी अस्पताल में इलाज कराने की अनुमति दी जाए। उन्होंने दलील दी कि मरीज को अपनी पसंद के अस्पताल और चिकित्सकों से इलाज कराने का अधिकार है। सिब्बल ने यह भी कहा कि वांगचुक को अपने निजी डॉक्टरों और वकीलों तक पर्याप्त पहुंच नहीं मिल रही है। उन्होंने अदालत को बताया कि एक निजी अस्पताल ने उन्हें स्थानांतरित करने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था भी कर रखी है और उनकी मांग केवल बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने तक सीमित है।

वहीं केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि सरकार हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों का पूरी तरह पालन कर रही है। उन्होंने कहा कि जब सोनम वांगचुक के शरीर में पोटैशियम का स्तर 2.9 से नीचे पहुंच गया और उनकी स्थिति गंभीर होने लगी, तब विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया। यह निर्णय पूरी तरह चिकित्सकीय आधार पर लिया गया था।

सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि सोनम वांगचुक की पत्नी, भाई और साले को अस्पताल में चौबीसों घंटे मिलने की अनुमति दी गई है तथा उनके ठहरने के लिए अलग कमरा भी उपलब्ध कराया गया है। एएसजी चेतन शर्मा ने कहा कि अस्पताल उपचार का स्थान है, न कि अदालत, इसलिए अनियंत्रित रूप से वकीलों और अन्य लोगों के प्रवेश की अनुमति देना व्यावहारिक नहीं है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि उपचार के दौरान निजी लैब की रिपोर्ट के बजाय अस्पताल की आधिकारिक जांच रिपोर्ट को ही मान्यता दी जाती है। अदालत ने केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और अस्पताल प्रशासन को तीन दिनों के भीतर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब इस मामले में मुख्य न्यायाधीश के समक्ष होने वाली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं, जहां निजी अस्पताल में स्थानांतरण की मांग पर आगे की कानूनी दिशा तय हो सकती है।